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निर्माण श्रमिक सुलभ्य आवास योजना

June 23, 2018

निर्माण श्रमिक सुलभ्य आवास योजना

हितलाभ-

1. हाउसिंग फाॅर आॅल मिशन (अरबन) अथवा सरकार की अफोर्डेबल हाउसिंग योजना अथवा मुख्यमंत्री जन आवास योजना अथवा केन्द्र/राज्य सरकार की अन्य किसी आवास योजना के पात्र हिताधिकारियों को, संबंधित योजना के प्रावधानानुसार, मण्डल द्वारा अधिकतम् 1.50 लाख रूपये तक की सीमा में अनुदान।

2. स्वयं के भूखण्ड पर आवास का निर्माण करने की स्थिति में अधिकतम 5 लाख रूपये निर्माण लागत की सीमा में, वास्तविक निर्माण लागत का 25 प्रतिशत तक, अनुदान।

वरीयता (योजना की अन्य शर्तें पूरा करने की स्थिति में) -

(i) बीपीएल श्रेणी के हिताधिकारी को,

(ii) अनु. जाति/अनु. जन जाति के हिताधिकारी को,

(iii) विशेष योग्यजन को

(iv) केवल दो पुत्रियाँ वाले हिताधिकारियों को

(v) पालनहार योजना में आने वाली महिला/परिवार को

(vi) तथा एक से अधिक वर्षाें अर्थात्, 2, 3 या 4 वर्षों से मण्डल में पंजीकृत हिताधिकारी को वरीयता दी जावेगी।

पात्रता एवं शर्ते-

1. मण्डल में कम से कम 1 वर्ष से हिताधिकारी के रूप में पंजीकृत निर्माण श्रमिक हो;

2. यदि स्वयं के भूखण्ड पर आवास बनाता है तो भूखण्ड पर स्वयं का या पत्नी/ पति का मालिकाना हक हो तथा उक्त भूखण्ड/सम्पत्ति विवाद रहित, बंधक रहित हो;

3. वित्तीय संस्था/बैंक से ऋण लेने के अतिरिक्त, स्वयं की बचत या अन्य स्त्रोत से ऋण लेकर आवास का निर्माण करने की स्थिति में, आवास की अनुमानित निर्माण लागत का प्रमाणिकरण पंचायत अथवा नगर पालिका के कनिष्ठ अभियन्ता या उससे उच्च अभियन्ता से प्राप्त करना आवश्यक होगा;

4. यदि हिताधिकारी अथवा उसकी पत्नि/पति अथवा आश्रित पुत्र या पुत्री के नाम पर/मालिकाना हक में पहले से कोई आवास है तो ऐसे हिताधिकारी को इस योजना में अनुदान/सहायता देय नहीं होगी;

5. आवास का मालिकाना हक पति व पत्नी दोनों के संयुक्त नाम में होगा;

आवेदन की समय सीमा- 

योजनानुसार वर्ष में कभी भी।

आवेदन के साथ लगाये जाने वाले दस्तावेज 

1. बीपीएल श्रेणी के प्रमाण पत्र/कार्ड की प्रति (यदि लागू हो तो)।
2. अनु.जाति या अनु.जन.जाति प्रमाण पत्र की स्वप्रमाणित प्रति (यदि लागू हो तो)।
3. विशेष योग्यजन प्रमाण पत्र की स्वप्रमाणित प्रति (यदि लागू हो तो)।
4. पालनहार योजना में आने वाली महिला/परिवार प्रमाण पत्र की स्वप्रमाणित प्रति (यदि लागू हो तो)।
5. केवल दो पुत्रियाँ हो तो इस आषय के प्रमाण पत्र की प्रति (यदि लागू हो तो)।
6. वार्षिक आय, प्रमाण पत्र की स्वप्रमाणित प्रति (रूपयों में)।
7. भूखण्ड पर स्वयं का या पत्नि/पति का मालिकाना हक होने का प्रमाण/दस्तावेज की स्वप्रमाणित प्रति (यदि लागू हो तो)।
8. प्लाट/भूखण्ड के सभी प्रकार के विवादों से मुक्त होने का राजस्व अधिकारी से प्राप्त संबंधित दस्तावेज की स्व-प्रमाणित प्रति। (यदि लागू हो तो)
9. सम्बन्धित अधिकारियों द्वारा अनुमोदित विस्तृत आकलन/प्राक्कलन तथा ले-आउट प्लान की स्वप्रमाणित प्रति (यदि लागू हो तो)।
10 वित्तीय संस्थान/बैंक से आवास ऋण लेकर आवास निर्माण करने की स्थिति में संबंधित वित्तीय संस्थान/बैंक द्वारा जारी ऋण स्वीकृति पत्र की स्वप्रमाणित प्रति। (यदि लागू हो तो)
11 स्वयं की बचत या बैंक वित्तीय संस्था से भिन्न किसी अन्य स्त्रोत से ऋण लेकर आवास निर्माण करने की स्थिति में आवास की अनुमानित निर्माण लागत के प्रमाण-पत्र, जो पंचायत अथवा नगर पालिका के कनिष्ट अभियन्ता या उससे उच्च स्तर के अभियन्ता द्वारा जारी किया गया हो, की स्वप्रमाणित प्रति। (यदि लागू हो तो)
12. हिताधिकारी पंजीयन परिचय पत्र या कार्ड की प्रति
13. भामशाह परिवार कार्ड या भामाषाह नामांकन की प्रति
14. आधार कार्ड की प्रति
15. बैंक खाता पासबुक के पहले पृष्ठ की प्रति
हाउसिंग फार आल मिशन (अरबन) या सरकार की अर्फोडेबल हाउसिंग या मुख्यमंत्री जन आवास योजना या केन्द्र/राज्य सरकार की अन्य किसी आवास योजना के अन्तर्गत आवास प्राप्त करने की निर्धारित शर्ते व पात्रता पूरी करने के संबंध में वांछित दस्तावेज, की स्वप्रमाणित प्रति। (यदि लागू हो तो)

आवेदन पत्र डाउनलोड करें-


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Rajasthan Seeds Mini-kit Scheme- राजस्थान बीज मिनिकिट योजना

June 17, 2018

बीज मिनिकिट योजना
 
   

  • राज्य योजना, राष्ट्रीय तिलहन एवं ऑयल पॉम मिशन तथा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत मिनिकिट वितरण       
  • मिनिकिट का आयोजन राजस्थान के विभिन्न जलवायु क्षेत्रों के लिए फसल की उपज एवं गुणवत्‍ता के आधार पर किस्म चयन में सहायक होती है।
  • कमजोर वर्ग के कृषकों को मिनिकिट के माध्‍यम से लाभान्वित किया जाता है।

पात्रता :-

  • मिनिकिट अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, लघु एवं सीमान्त तथा गरीबी की रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले कृषकों को प्राथमिकता से मिनिकिट का वितरण किया जाता है।
  • कुल लागत का 10 प्रतिशत टोकन मनी के रूप में कृषक से वसूल कर मिनिकिट वितरण किये जाते हैं।
  • मिनिकिट महिला के नाम से दिये जाते है, चाहे भूमि महिला के पति/पिता/ससुर के नाम से हो।
  • एक महिला को मिनिकिट का एक ही पैकेट दिया जायेगा।
  • एक ही कृषक परिवार की अलग-अलग कृषक महिला सदस्य के नाम से मिनिकिट नहीं दिए जाएंगे।
  • यदि किसी ग्राम पंचायत में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के कृषक उपलब्‍ध नहीं हो तो सामान्य श्रेणी के महिला कृषकों में मिनिकिट वितरण किया जा सकता है।
  • मिनिकिट्स हेतु ऐसे कृषकों का चयन किया जाएगा, जिन्हें गत तीन वर्ष में मिनिकिट कार्यक्रम में लाभान्वित नहीं किया गया हो।
  • सिंचाई की सुविधा वाले कृषकों को प्राथमिकता जाती है।



आवेदन प्रक्रिया :-

  • सहायक निदेशक कृषि विस्तार के कार्यालय में सम्बन्धित ग्राम पंचायत के कृषि पर्यवेक्षक के माध्यम से।
  • चयन हेतु पात्र महिलाओं की सूची कृषि पर्यवेक्षक द्वारा सम्बिन्धित ग्राम पंचायत के सरपंच एवं अन्य निर्वाचित जन प्रतिनिधियों के साथ विचार विमर्श कर ग्रामवार बनाई जाएगी।
  • चयन हेतु पात्र महिला कृषकों की सूची कृषि पर्यवेक्षक द्वारा लक्ष्य से 3 गुना अधिक महिलाओं की सूची बनाई जाती है तथा पात्र महिलाओं का चयन लाटरी पद्धति से किया जाने का प्रावधान है।

समय अवधि :-

  • बुवाई समय 15 दिन से पूर्व।

कहां सम्पर्क करें :-

  • ग्राम पंचायत स्तर पर :- कृषि पर्यवेक्षक
  • पंचायत समिति स्तर पर :- सहायक कृषि अधिकारी
  • उप जिला स्तर पर :- सहायक निदेशक कृषि (विस्तार) / उद्यान कृषि अधिकारी।
  • जिला स्तर पर :- उप निदेशक कृषि (विस्तार) / उपनिदेशक उद्यान।
Source- http://www.agriculture.rajasthan.gov.in
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Agriculture Schemes of Rajasthan - प्रमाणित बीज वितरण हेतु अनुदान सहायता

June 17, 2018

प्रमाणित बीज वितरण हेतु अनुदान सहायता

फसल उत्‍पादन में गुणवत्‍तायुक्‍त /प्रमाणित बीज का प्रमुख योगदान है। इससे ना केवल प्रति इकाई फसल उत्‍पादन में 15 से 20 प्रतिशत की वृद्धि होती है, अपितु फसल उत्‍पादन के अन्‍य आदानों यथा उर्वरक, सिचाई आदि का भी समुचित उपयोग होता है।

देय लाभ :-

विभाग द्वारा संचालित विभिन्‍न योजनाओं के तहत प्रमाणित बीज वितरण पर देय लाभ का विवरण निम्‍नानुसार है।
1     दलहनी फसले (मूंग, मोठ, उडद, अरहर, चना)-
  •  15 वर्ष तक की अवधि की अधिसूचित किस्‍मों के बीज की कीमत का 50 प्रतिशत अ‍थवा रूपये 2500 प्रति क्वि. जो भी कम हो
2     मोटा अनाज (बाजरा, ज्‍वार, मक्‍का, जौ) की किस्‍में-     
  •  सामान्य किस्‍में- 
 10 वर्ष से कम अ‍वधि की अधिसूचित किस्‍मों के बीज की कीमत का 50 प्रतिशत अ‍थवा रूपये 1500 प्रति क्वि. जो भी कम हो
  • संकर किस्‍में - 
10 वर्ष से कम अ‍वधि की अधिसूचित किस्‍मों के बीज की कीमत का 50 प्रतिशत अ‍थवा रूपये 5000 प्रति क्वि. जो भी कम हो।
3     गेहूं एवं धान-     
  • 10 वर्ष से कम अ‍वधि की अधिसूचित किस्‍मों के बीज की कीमत का 50 प्रतिशत अ‍थवा रूपये 1000 प्रति क्वि. जो भी कम हो
4     ग्‍वार -    
  • 10 वर्ष से कम अ‍वधि की अधिसूचित किस्‍मों के बीज की कीमत का 50 प्रतिशत अ‍थवा रूपये 1200 प्रति क्वि. जो भी कम हो।
5     तिलहनी फसले (सोयाबीन, मूंगफली, तिल, अरण्‍डी, सरसो) -    
  • सामान्य किस्‍में- 
15 वर्ष तक की अ‍वधि की अधिसूचित किस्‍मों के बीज की कीमत का 50 प्रतिशत अ‍थवा रूपये 2500 एवं तिल हेतु रूपये 5000 प्रति क्विं., जो भी कम हो।
  • संकर किस्‍में-  
15 वर्ष तक की अ‍वधि की अधिसूचित किस्‍मों के बीज की कीमत का 50 प्रतिशत अ‍थवा रूपये 5000 प्रति क्वि., जो भी कम हो।

पात्रता :-

  • समस्‍त श्रेणी के कृषक जिले में जनसंख्‍या के अनुपात में
  • स्‍वपरागित फसल होने से तीन वर्ष में एक बार, परपरागित फसल हेतु दो वर्ष में एक बार एवं संकर किस्‍मों हेतु प्रति वर्ष अनुदान पर बीज प्राप्‍त किया जा सकता है।
  • दलहनी फसले, मोटा अनाज, गेहँ, धान एवं ग्‍वार फसल के तहत एक कृषक को अधिकतम 2 है0 क्षैत्र हेतु अनुदानित दर पर प्रमाणित बीज देय।
  • समस्‍त तिलहनी फसलों हेतु अधिकतम 5 है0 तक ही प्रमाणित बीज अनुदान पर उपलब्‍ध कराया जा सकता है। अनुदानित बीज पहले आओ पहले पाओं के सिदान्‍त पर उपलब्‍ध

आवेदन प्रक्रिया :-

  • अनुदानित दर पर प्रमाणित बीज प्राप्‍त करने हेतु कृषक द्वारा संबधित कृषि पर्यवेक्षक/ सहायक कृषि अधिकारी कार्यालय में सम्‍पर्क करें।
  • प्रपत्र में संबधित कृषि पर्यवेक्षक/ सहायक कृषि अधिकारी से सिफारिश उपरान्‍त उनके क्षैत्र में कार्यरत ग्राम सेवा/ क्रय विक्रय सहकारी समिति/ सार्वजनिक क्षेत्र की बीज संस्‍थाओं के अधिकृत निजी विक्रेताओं से सिफारिश की गई फसल की किस्‍म का बीज अनुदानित दर पर प्राप्‍त कर सकते है।

समयावधि- 

  • खरीफ, रबी व जायद हेतु उपयुक्‍त बुआई समय अनुसार।

बीज प्राप्ति स्‍थल :-

  • ग्राम सेवा/ क्रय विक्रय सहकारी समिति/ सर्वाजनिक क्षेत्र की बीज संस्‍थाओं के अधिकृत निजी विक्रेता।



कहां सम्पर्क करें :-

  • ग्राम पंचायत स्तर पर :- कृषि पर्यवेक्षक कार्यालय
  • पंचायत समिति स्तर पर :- सहायक कृषि अधिकारी कार्यालय
  • उप जिला स्तर पर :- सहायक निदेशक कृषि (विस्तार) कार्यालय
  • जिला स्तर पर :- उप निदेशक कृषि (विस्तार) जिला परिषद कार्यालय
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Sahyog and Uphar Plan of Rajasthan सहयोग एवं उपहार योजना

May 30, 2018

सहयोग एवं उपहार योजना

 

योजना की वर्तमान स्थिति

राजस्थान सरकार द्वारा 1997-98 से आर्थिक दृष्टि से कमजोर विधवा महिलाओं के पुत्रियों के विवाह के लिए अनुदान योजना प्रारम्भ की गयी थी। इसी प्रकार वर्ष 2005 में बी.पी.एल. परिवारों को पुत्रियों के विवाह हेतु सहयोग योजना शुरू की गयी थी। राजस्थान सरकार द्वारा वर्ष 2016-17 में दोनों योजनाओं को एक करके  सहयोग एवं उपहार योजना शुरू की गयी थी। योजना का लाभ पात्र व्यक्ति को समय पर एवं पारदर्शिता से मिले, इस हेतु इस वर्ष ऑनलाईन पोर्टल के माध्यम से सहायता राशि स्वीकृत करने की प्रक्रिया प्रारम्भ की जा रही है।

लाभांवित वर्ग-

सहयोग एवं उपहार योजना सभी वर्गों के बी.पी.एल. परिवार, अन्त्योदय परिवार, आस्था कार्डधारी परिवार तथा आर्थिक दृष्टि से ऎसे कमजोर परिवार जिनमें कमाने वाला वयस्क व्यक्ति नहीं हो, ऎसी विधवा महिलाओं की पुत्रियों के विवाह के लिए सहायता राशि उपलब्ध करायी जाती है।

देय सहायता राशि-

सहयोग एवं उपहार योजना में वर्ष 2017-18 में मुख्यमंत्री की बजट घोषणा के अनुसार देय सहायता राशि में वृद्धि की गई है। वर्तमान में पुत्रियों के विवाह पर 20 हजार रुपये, दसवीं पास कन्या के विवाह पर 30 हजार रुपये एवं स्नातक पास कन्या के विवाह पर 40 हजार रुपये का अनुदान दिया जाता है।

उपलब्धियाँ-

सहयोग एवं उपहार योजना में प्रदेश में गत साढ़े तीन वर्ष के दौरान 33 हजार 700 विधवाओं की पुत्रियों के विवाह पर 46.77 करोड़ रुपये अनुदान प्रदान कर आर्थिक सहायता दी जा रही है। वित्तीय वर्ष 2014-15 में 15 करोड़ 62 लाख 62 हजार रुपये की सहायता प्रदान कर 12005 कन्याओं के विवाह के लिए सहायता दी गयी। इसी प्रकार वर्ष 2015-16 में 11 हजार 651 कन्याओं के विवाह के लिए   15 करोड़ 48 लाख 50 हजार, वर्ष 2016-17 में 8 हजार 425 कन्याओं के विवाह के लिए 12 करोड़ 4 लाख 10 हजार, वर्ष 2017-18 में सितम्बर, 2017 तक 3 करोड़ 62 लाख पाँच हजार रुपये का अनुदान देकर 1 हजार 616 कन्याओं को लाभांवित किया गया है।

 

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Rajasthan Shubh Shakti Yojna of Construction Workers Welfare Board - शुभशक्ति योजना

March 04, 2018

श्रमिक कल्याण मण्डल, राजस्थान की शुभशक्ति योजना

इस योजना का शुभारंभ श्रम विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा किया गया है । इस योजना का उद्देश्य श्रमिकों के हितों की रक्षा और अविवाहित महिलाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करना है ।

हितलाभ- 

हिताधिकारियों की वयस्क व अविवाहिता पुत्री को तथा महिला हिताधिकारी को 55,000 रूपये प्रोत्साहन/सहायता राशि देय होगी। प्रोत्साहन राशि का उपयोग महिला हिताधिकारी/पुत्री के विवेक के अनुसार आगे शिक्षा या व्यावसायिक प्रशिक्षण प्राप्त करने, स्वयं का व्यवसाय प्रारम्भ करने, कौशल विकास प्रशिक्षण प्राप्त करने आदि में तथा स्वयं के विवाह हेतु उपयोग में लिया जाएगा ।

पात्रता एवं शर्ते·

1 लड़की के पिता या माता अथवा दोनों, कम से कम एक वर्ष से श्रमिक कल्याण मण्डल में पंजीकृत हिताधिकारी/निर्माण श्रमिक हों। पंजीयन कराने  के लिए किसी भी ई मित्र केन्द्र से हिताधिकारी को https://sso.rajasthan.gov.in/signin लिंक पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा । सबसे पहले उसे अपनी SSO आई डी  बनानी होगी और फिर श्रम विभाग के एप पर क्लिक करके पंजीयन करवाना होगा ।
 2 अधिकतम् दो पुत्रियों अथवा महिला हिताधिकारी को और उसकी एक पुत्री को प्रोत्साहन राशि देय होगी।
3 महिला हिताधिकारी अविवाहिता हो अथवा हिताधिकारी की पुत्री की आयु न्यूनतम् 18 वर्ष पूर्ण हो गई हो तथा वह अविवाहिता हो ।
4 हिताधिकारी की पुत्री/महिला हिताधिकारी कम से कम 8वीं कक्षा उत्तीर्ण हो ।
5 हिताधिकारी की पुत्री/महिला हिताधिकारी के नाम से बचत बैंक खाता हो ।
6 हिताधिकारी का स्वयं का आवास होने की स्थिति में, आवास में शौचालय हो ।
7 आवेदन की तिथि से पूर्व के एक वर्ष की अवधि में हिताधिकारी कम से कम 90 दिन निर्माण श्रमिक के रूप में कार्यरत रहा हो ।
8 प्रोत्साहन राशि हिताधिकारी के निर्माण श्रमिक होने के भौतिक सत्यापन की शर्त पर ही देय होगी। निर्माण श्रमिक होने का सत्यापन तहसीलदार, विकास अधिकारी, सहायक व उच्च अभियन्ता, सरकारी माध्यमिक विद्यालय का प्रधानाध्यापक अथवा अन्य राजपत्रित अधिकारी द्वारा किया जा सकेगा ।
9 प्रोत्साहन राशि का उपयोग महिला हिताधिकारी/पुत्री के विवेक के अनुसार आगे शिक्षा या व्यावसायिक प्रशिक्षण प्राप्त करने, स्वयं का व्यवसाय प्रारम्भ करने, कौशल विकास प्रशिक्षण प्राप्त करने आदि में तथा स्वयं के विवाह हेतु उपयोग में लिया जाएगा (स्वयं का व्यवसाय प्रारम्भ करने या कौशल विकास करने या व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त करने के लिए लड़की को उचित परामर्श प्रदान किया जाएगा) ।
10 योजना का हितलाभ प्राप्त करने के लिए हिताधिकारी द्वारा निर्धारित प्रपत्र में आवेदन, पंजीकृत हिताधिकारी के रूप में एक वर्ष पूरा होने के पश्चात्, प्रस्तुत किया जाएगा। परन्तु यह आवश्यक होगा कि योजना का आवेदन प्रस्तुत करने के समय हिताधिकारी का परिचय-पत्र वैध/एक्टिव हो ।
 

आवेदन की समय सीमा-

आवेदन पत्र हिताधिकारी द्वारा पंजीयन की तिथि से एक वर्ष की अवधि पूरी होने के पश्चात् तथा अविवाहिता पुत्री की आयु 18 वर्ष पूर्ण होने की तिथि से 6 माह की अवधि में अथवा योजना लागू होने की तिथि से 6 माह की अवधि में, जो भी लागू हो हो, अथवा लड़की की शादी होने से पूर्व प्रस्तुत किया जा सकेगा।

आवेदन के साथ लगाये जाने वाले दस्तावेज-

1 हिताधिकारी की पुत्री,के बैंक खाते की पासबुक के प्रथम पृष्ठ (जिसमें हिताधिकारी का नाम, बैंक खाता संख्या व आईएफएससी कोड अंकित हो) की प्रति।
2 हिताधिकारी की पुत्री की आयु 18 वर्ष पूरी होने के प्रमाण पत्र की प्रति।
3 महिला हिताधिकारी अथवा हिताधिकारी की पुत्री के कक्षा 8 उत्तीर्ण करने की अंक तालिका, जो राजकीय अथवा राज्य सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त निजी विद्यालय द्वारा जारी की गई हो, की प्रति।
4 हिताधिकारी पंजीयन परिचय पत्र या कार्ड की प्रति।
5 भामाशाह परिवार कार्ड या भामाशाह नामांकन की प्रति।
6 आधार कार्ड की प्रति।
7 बैंक खाता पासबुक के पहले पृष्ठ की प्रति।

 आवेदन पत्र  डाउनलोड करने तथा योजना की अधिसूचना की जानकारी लेने के लिए यहां नीचे क्लिक करें -

 For Download of Application Form Click Here

Click Here for Notification of Shubh Shakti Yojna

निर्माण श्रमिक के हिताधिकारी के रूप में पंजीयन कराने की पात्रता एवं तरीका –

1. उसकी आयु 18 वर्ष से कम नही हो तथा उसने 60 वर्ष की आयु पूरी नहीं की हो। अर्थात आयु 18 से 60 वर्ष के मध्य हो तथा

2. उसने पिछले 1 वर्ष (12 माह) की अवधि में किसी भी निर्माण कार्य पर कम से कम 90 दिन निर्माण श्रमिक के रूप में काम किया हो।

नोट – यह आवश्यक नहीं है कि निर्माण श्रमिक द्वारा किसी एक ही निर्माण कार्य पर 90 दिन कार्य किया जाए। भिन्न-भिन्न कार्यों पर किया गया काम भी 90 दिन की गणना में शामिल होगा। 

हिताधिकारी के रूप में पंजीयन के आवेदन श्रम विभाग के कार्यालयों और अन्य विभागों के पंजीयन अधिकारियों यथा- विकास अधिकारियों तथा सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) व जल संसाधन विभाग के सहायक अभियन्ताओं के कार्यालयों में उपलब्ध है। आवेदन पत्र श्रम विभाग की वेबसाईट www.rajlabour.nic.in से और मण्डल की वेबसाइट से भी डाउनलोड किया जा सकता है। आवेदन पत्र का कोई शुल्क नही है, अर्थात यह निःशुल्क है।

आवेदन की प्रक्रिया निम्न प्रकार है –
1. आवेदन पत्र लेकर उसमें वांछित विवरण भरे।
2. आवेदन के साथ लगाएं (1) अपनी आयु का निम्न में से कोई एक प्रमाण पत्र – (a) किसी स्कूल के रिकाॅर्ड से जारी प्रमाण पत्र (b) जन्म-मृत्यु पंजीयक के रिकाॅर्ड से जारी प्रमाण पत्र (c) आधार कार्ड या ड्राईविंग लाइसेंस या मतदाता पहचान पत्र (d) उपरोक्त वर्णित कोई भी प्रमाण-पत्र नहीं होने की स्थिति में किसी सरकारी अस्पताल के डाॅक्टर द्वारा जारी प्रमाण-पत्र।
3. पासपोर्ट साईज की 3 रंगीन फोटो।
4. नियोजक या ठेकेदार का निर्माण श्रमिक होने का प्रमाण-पत्र ।

अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें -

http://bocw.labour.rajasthan.gov.in/faq/ 

Rajasthan Shubh Shakti Yojna of Construction Workers Welfare Board - शुभशक्ति योजना Rajasthan Shubh Shakti Yojna of Construction Workers Welfare Board - शुभशक्ति योजना Reviewed by asdfasdf on March 04, 2018 Rating: 5

झालावाड़ जिले के कंवरपुरा मण्डवालान से मुख्यमंत्री स्वच्छ ग्राम योजना का शुभारंभ

January 08, 2017

झालावाड़ जिले के कंवरपुरा मण्डवालान से मुख्यमंत्री स्वच्छ ग्राम योजना का शुभारंभ  

जयपुर, 6 जनवरी। मुख्यमंत्री स्वच्छ ग्राम योजना गांव को स्वच्छ, स्वस्थ एवं सुन्दर बनाने के लिए प्रारम्भ की गई राज्य सरकार की महत्ती योजना है। यह योजना राज्य की उन ग्राम पंचायतों में लागू की जा रही है जो कि खुले में शौच जाने के अभिशाप से मुक्त (ओडीएफ) हो चुकी है। योजना का राज्य स्तरीय शुभारंभ शुक्रवार को पंचायत समिति खानपुर की ग्राम पंचायत कंवरपुरा मण्डवालान में राज्य जन अभाव अभियोग निराकरण समिति के अध्यक्ष श्रीकृष्ण पाटीदार, संसदीय सचिव श्री नरेन्द्र नागर, जिला प्रमुख टीना कुमारी भील तथा जिला कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी द्वारा किया गया।
समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए श्रीकृष्ण पाटीदार ने कहा कि जिले की पहली ओडीएफ ग्राम पंचायत कंवरपुरा मण्डवालान के लिए बड़े ही गर्व का विषय है कि मुख्यमंत्री स्वच्छ ग्राम योजना का शुभारम्भ यहां से किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस योजना के प्रारम्भ होने से न सिर्फ ग्राम पंचायत कंवरपुरा मण्डवालान को बल्कि राज्य की ओडीएफ हो चुकी अन्य ग्राम पंचायतें भी स्वच्छ, स्वस्थ एवं सुन्दर हो सकेंगी। 
  • इस योजना के अन्तर्गत प्रतिदिन घर-घर जाकर रिक्शा ट्रोली के माध्यम से कचरा संग्रहण किया जाएगा। 
  • ट्रोली के दो भाग होंगे। हरे भाग में सड़नशील कचरा (बॉयोडीग्रेडेबल) तथा लाल भाग में न सड़ने वाला (नोन बॉयोडीग्रेडेबल) कचरा होगा। 
  • ग्राम पंचायत कें प्रत्येक गांव में लगभग 150 घरों का क्लस्टर बनाया जाएगा। क्लस्टर के इन घरों तथा सामुदायिक कचरा पात्र से ठोस कचरे के संग्रहण एवं परिवहन के लिए महात्मा गांधी नरेगा योजना के तहत दो श्रमिकों का नियोजन 100 दिवसों के लिए किया जाएगा। 
  • इससे ग्राम पंचायत के करीब 30 लोगों को न सिर्फ रोजगार प्राप्त होगा बल्कि कचरा प्रबंधन से ग्राम पंचायत को वार्शिक आय भी प्राप्त होगी।      
  • इस योजना के अन्तर्गत जैसे दूध वाला घर-घर जाकर घण्टी बजाकर दूध देकर जाता है उसी प्रकार रिक्शा ट्रोली वाला घर-घर जाकर घण्टी बजाकर लोगों से कचरे का संग्रहण करेगा और कचरे को ग्राम पंचायत द्वारा निर्मित पिट में ही लाकर डालेगा। ग्राम पंचायत में सामुदायिक स्थानों एवं चौराहों पर सामुदायिक कचरा पात्र भी रखे गए हैं। जिसमें सामुदायिक स्थानों पर कचरा उन्हीें कचरा पात्रों में डाला जाएगा। 

समारोह के विशिष्ट अतिथि जिला कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी ने कहा कि मुख्यमंत्री स्वच्छ ग्राम योजना का शुभारंभ यहां की पहली ओडीएफ ग्राम पंचायत कंवरपुरा मण्डवालान में होना न सिर्फ जिले के लिए बल्कि राज्य के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने ग्रामवासियों से अपील की है कि वे अपनी मानसिकता में परिवर्तन लाएं और कचरे को कचरा संग्रहण करने आने वाले की ट्रोली में ही डालें। वे कचरा घर के बाहर न फैंके बल्कि कचरा संग्रहण करने वाली रिक्शा ट्रोली में ही कचरा डालें। इस योजना के माध्यम से न सिर्फ गांव के युवाओं को रोजगार मिलेगा बल्कि कचरा प्रबंधन से गांव पंचायतों को आय भी होगी। उन्होंने बताया कि ओडीएफ हो चुकी ग्राम पंचायतों को ठोस कचरा प्रबंधन योजना के अन्तर्गत इस ग्राम पंचायत को 20 लाख रुपए की राशि दिलाने के लिए प्रस्ताव भी जिला परिषद् द्वारा राज्य सरकार को भेजा जाएगा।     

रीना नागर एवं गायत्री नागर बनी स्वच्छता सखी -

मुख्यमंत्री स्वच्छ ग्राम योजना के अन्तर्गत ग्रामीणों में विशेष कर महिलाओं में स्वच्छता के प्रति जागरूकता लाने के लिए कंवरपुरा मण्डवालान के लिए रीना नागर एवं गायत्री नागर को स्वच्छता सखी बनाया गया है। ये सखियां प्रतिदिन लोगों को घर-घर जाकर कचरे को बाहर न फैंकने व कचरा संग्रहण के लिए आने वाली ट्राली में ही कचरा डालने के लिए प्रेरित करेंगी। वे बताएंगी कि गांव में न बिखरेगा कचरा तो ही निखरेगा गांव।
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Prasav Sakhi Programme of Rajasthan - राजस्थान का ‘प्रसव सखी‘ कार्यक्रम

January 08, 2017

राजस्थान का ‘प्रसव सखी‘ कार्यक्रम 

(Prasav Sakhi Programme of Rajasthan)

राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री ने 2 अक्टूबर 2016 को प्रदेश में ‘प्रसव सखी‘ कार्यक्रम का शुभारंभ किया। प्रदेश में भी अधिक प्रसवभार वाले 30 राजकीय चिकित्सालयों में तमिलनाडु एवं छत्तीसगढ़ राज्यों की तर्ज पर ‘प्रसव सखी‘ कार्यक्रम को पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर प्रारंभ किया गया। इनमें चुनिंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल, जिला अस्पताल एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र शामिल है। इस कार्यक्रम के तहत प्रदेश के राजकीय चिकित्सालयों में ‘प्रसव सखी‘ द्वारा प्रसूता को प्रसव पीड़ा में भावनात्मक सहयोग प्रदान करने एवं डिलीवरी के दौरान चिकित्सालय में उसके साथ ‘प्रसव सखी‘ के रह सकने का प्रावधान किया गया है।
इस योजना के तहत प्रसव सखी का चयन करते समय स्वयं के परिवार की प्रसव की अनुभवी महिला को प्राथमिकता दी जाती है। योजना में प्रसव के समय प्रसूता के साथ उसके परिवार की स्वस्थ एवं व्यावहारिक महिला का प्रसव सखी के रूप में सहयोग लिया जा रहा है। प्रसव सखी डिलीवरी के समय प्रसूता को भावनात्मक रूप से सहयोग देने के साथ ही जन्म के तुरंत बाद ही शिशु को स्तनपान प्रारंभ करवाने में भी अहम् भूमिका निभा रही है। प्रसव के बारे में अनुभवी परिवार की ही महिला के प्रसव सखी के रूप में मौजूद रहने से प्रसूता सहजता महसूस करती है। प्रसव सखी प्रसूता के साथ प्रसव से पूर्व, प्रसव के दौरान एव प्रसव के पश्चात् उपस्थित रहकर प्रसूता को भावनात्मक संबल प्रदान करती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने यह सिद्ध किया है कि विकासशील देशों में मातृ स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने के लिए प्रसव सखी का  महत्वपूर्ण योगदान हैं। हमारे देश में प्रसव सखी प्रोग्राम तमिलनाडु व छत्तीसगढ़ में भी प्रारम्भ किया जा चुका है। 

प्रसव सखी के प्रभाव -

  • प्रसव सखी के प्रभाव के बारे में किए गए एक अध्ययन के अनुसार इससे माता और शिशु के बीच में भावनात्मक संबंध स्थापित होता है। 

  • प्रसव सखी से प्रसव पश्चात् होने वाला डिप्रेशन कम होता है एवं प्रसूता व नवजात के लिए आवश्यक स्तनपान को बढ़ावा मिलता है। 

  • विशेषज्ञों के अनुसार प्रसव सखी की उपस्थिति के कारण प्रसूता के तनाव में कमी आती है। इससे गर्भाशय का संकुचन अच्छे से होता है और प्रसव सामान्य होने की संभावनाएं बढ़ जाती है।  

प्रसव सखी के चयन से पूर्व यह सुनिश्चित किया जाता है कि उसे बुखार, खांसी इत्यादि संक्रमण फैलाने वाले लक्षण न हो। प्रसव कक्ष में प्रवेश करते समय प्रसव सखी द्वारा संक्रमण रोकने के लिए दिए जाने वाली सामग्री गाउन, मास्क, टोपी, चप्पल इत्यादि का उपयोग किया जाता है। प्रसव सखी का प्रसूता की रिश्तेदार होने के कारण कोई वित्तीय भार सरकार या प्रसूता पर नहीं होता। इससे चिकित्सा कर्मियों के दुर्व्यवहार की शिकायतें कम होने के साथ ही बच्चे के बदलने एवं चोरी होनी की संभावना कम होगी।
पॉयलेट प्रोजेक्ट के तौर पर ‘प्रसव सखी‘ कार्यक्रम  निम्नांकित अस्पतालों में शुरू किया गया है-
1. अजमेर - जेएलएन मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय, ए.के.एच., ब्यावर, एसडीएच, किशनगढ़
2. बीकानेर संभाग में पीबीएम मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ व चूरू
3. जयपुर संभाग में सीएचसी चौमूं, फुलेरा,
4. अलवर में जिला अस्पताल अलवर, सीएचसी राजगढ़
5. सीकर जिला अस्पताल
6. दौसा जिला चिकित्सालय,
7. उदयपुर संभाग में जिला अस्पताल, बांसवाड़ा, डूंगरपुर व राजसमंद के चिकित्सालय
8. भरतपुर संभाग में जिला अस्पताल भरतपुर, सीएचसी बयाना, जिला चिकित्सालय धौलपुर
9. कोटा संभाग में जिला चिकित्सालय बूंदी, जिला चिकित्सालय बांरा व सीएचसी केलवा
10. जोधपुर संभाग में जिला चिकित्सालय बाड़मेर, जिला चिकित्सालय जैसलमेर, पाली, जालौर सिरोही के जिला अस्पतालों में तथा जोधपुर की सीएचसी भोपालगढ़ एवं सिरोही जिले की आबूरोड़ सीएचसी
प्रदेश में मातृ मृत्युदर एवं शिशु मृत्युदर को कम करने के उद्देश्य से प्रारम्भ की गयी प्रसव सखी योजना प्रसूताओं को प्रसव के समय भावनात्मक सहयोग प्रदान करने की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रही है।

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राजस्थान पशु बांझपन निवारण शिविर योजना (Combat Infertility in Cattle)

January 07, 2017

राजस्थान  पशु बांझपन निवारण शिविर योजना 

(Combat Infertility in Cattle)

उद्देश्यः-

राजस्थान प्रदेश में उपलब्ध पशुधन में से लगभग 10 प्रतिशत पशुधन प्रतिवर्ष बांझ होता है। बांझ पशुधन का समय पर उपचार होने से इन्हें प्रजनन योग्य बनाकर गर्भित किया जा सकता है। इसके लिये पशुपालकों को अपने पशुओं को बांझ होने से बचाने के उपायों की जानकारी उपलब्ध करवाना तथा उन्हें ऐसे पशुओं का चिह्नीकरण कर समय पर पूर्ण इलाज करवाने के लिये प्रेरित करना आवश्यक है।


कार्य योजनाः-

इस योजना के तहत् समस्त जिलों में पशुधन की संख्या एवं पशुधन के आधार पर 4 से 5 गांवों के एक काॅम्पेक्ट क्षेत्र का बांझ निवारण शिविर लगाने हेतु चयन किया जाता है। चयनित गांवों के बांझ पशुओं के पशुपालकों की सूची सर्वे कर तैयार की जाती है।

प्रत्येक शिविर की अवधि 5 दिवस होती है। प्रत्येक शिविर में कम से कम 50 पशुओं का बांझपन उपचार किया जाना आवश्यक है। शिविरों के आयोजन हेतु औषधियों का उपयोग पशुधन निःशुल्क आरोग्य दवा योजनान्तर्गत उपलब्ध औषधियों में से किया जाता है। शिविरों के आयोजन हेतु यदि ऐसी औषधियों की आवश्यकता है जो विभागीय अनुमोदित सूची में अनुमोदित नहीं है तो ऐसी औषधियों का क्रय पशुधन निःशुल्क आरोग्य दवा योजनान्तर्गत इमरजेन्सी औषधियों हेतु उपलब्ध प्रावधान में से क्रय की जाती है।

शिविर में प्रथम दिन बांझ पशुओं की Rectal palpation की जाती है जिसके आधार पर बांझपन चिकित्सा की जाती है। सर्वप्रथम समस्त बांझ पशुओं की सामान्य बांझपन चिकित्सा की जाती है (डीवर्मिग, मिनरल मिक्सचर, विटामिन-ए, डी-3, ई तथा सोडियम एसिड फाॅस्फेट, cocu tablet,clomin tablet)।

Rectal palpation की finding के आधार पर ovary में बनने वाली ल्यूटियल अथवा फालीक्यूलर संरचनाओं का रिकार्ड संधारण किया जाता है। पशुओं की सामान्य बांझपन चिकित्सा उपरांत गोष्ठी कर पशुपालकों को अपने पशुओं को बांझ होने से बचाने के उपायों की जानकारी उपलब्ध करवायी जाती है तथा उन्हें ऐसे पशुओं का चिह्नीकरण कर समय पर पूर्ण इलाज करवाने के लिये प्रेरित किया जा जाता है। इस शिविर की अवधि 2 दिवस होती है।

इस शिविर के प्रत्येक 7 दिवस के अंतराल पर 1-1 दिवस के तीन फालोअप शिविरों का आयोजन किया जाता है जिसमें उपचारित पशुओं की पुनः Rectal palpation की जाती है तथा ovary में बनने वाली ल्यूटियल अथवा फालीक्यूलर संरचनाओं की वर्तमान स्थिति का आंकलन कर जो पशु ताव में नहीं आए है उनमें आवश्यकतानुसार हार्मोन चिकित्सा की जाती है। साथ ही डीवर्मिग, मिनरल मिक्सचर, विटामिन-ए, डी-3, ई तथा सोडियम एसिड फाॅस्फेट, co,cu tablet, clomin tablet का उपयोग भी आवश्यकतानुसार नियमित रखा जाता है। उपचार से जो पशु ताव में आए है उनमें कृत्रिम गर्भाधान किया जाता है। कृत्रिम गर्भाधान के 60 से 90 दिन उपरांत गर्भ परीक्षण किया जाता है। उपचारित पशुओं का नियमित फालोअप संबंधित पशु चिकित्सा संस्था द्वारा किया जाता है जिससे बांझपन मुक्ति के परिणाम ज्ञात हो सकेगें।


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MUKHYAMANTRI RAJSHREE SCHEME - मुख्यमंत्री राजश्री योजना

December 26, 2016
बेटियां घर की लक्ष्मी हैं लेकिन कई कारणों से बालिकाओं की जन्म दर कम रही है। बेटियों के जन्म को प्रोत्साहित करने, उन्हें शिक्षित व सशक्त बनाने के लिए सरकार ने 1 जून 2016 से मुख्यमंत्री राजश्री योजना राज्य में शुरू की है। इस योजना का उद्देश्य है कि बेटियों की जन्म दर बढ़े, बेटियों को अच्छी परवरिश मिले व बेटियां पढ़ लिखकर आगे बढ़ें। 
बजट घोषणा 2016-17 के अनुसार मुख्यमंत्री‬ ‪शुभलक्ष्मी‬ ‎योजना‬ का नाम बदलकर आज से मुख्यमंत्री ‪‎राजश्री‬ योजना हो गया। इसी के साथ ही इसमें लाभान्वित राशि भी 7400 रुपए से बढ़कर 50 हजार रुपए कर दी  गई। शुभलक्ष्मी योजना में सरकार सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाली बेटी को 2100 रुपए की आर्थिक सहायता देती थी तथा योजना के तहत समय-समय पर मां-बेटी को 7400 रुपए तक की आर्थिक सहायता देने का भी प्रावधान था। शुभलक्ष्मी योजना 1 अप्रैल 2013 से संचालित थी जो अब राजश्री योजना हो गयी है।
मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे ने शुभलक्ष्मी योजना का नाम बदलने के साथ-साथ आर्थिक सहायता भी 50 हजार रुपए कर दी है एवं इसका लाभ 1 जून से सरकारी अस्पतालों तथा जेएसवाई द्वारा अधिस्वीकृत निजी अस्पतालों में जन्म लेने वाली बेटियों को मिलना प्रारंभ हुआ। इस योजना में उन बेटियों को शिक्षा के लिए 50 हजार रुपए दिए जाएंगे, जिनका जन्म सरकारी अस्पताल में हुआ है। यह राशि 12वीं तक पढ़ाई पूरी करने तक मिलेगी।

विभिन्न चरणों में बालिका के अभिवावकों को आर्थिक सहायता

बालिका के जन्म से लेकर कक्षा 12वीं तक बेटी की पढ़ाई, स्वास्थ्य व देखभाल के लिए अभिभावक को 50,000 तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। 
ये राशि निम्न चरणों में दी जाती है।
  • बेटी के जन्म के समय 2500 रुपये
  • एक वर्ष का टीकाकरण होने पर 2500 रुपये
  • पहली कक्षा में प्रवेश लेने पर 4000 रुपये
  • कक्षा 6 में प्रवेश लेने पर 5000 रुपये
  • कक्षा 10 में प्रवेश लेने पर 11000 रुपये
  • कक्षा 12 उत्तीर्ण करने पर 25000 रुपये


    MUKHYAMANTRI RAJSHREE SCHEME - मुख्यमंत्री राजश्री योजना MUKHYAMANTRI RAJSHREE SCHEME - मुख्यमंत्री राजश्री योजना Reviewed by asdfasdf on December 26, 2016 Rating: 5

    Annapurna kitchen scheme अन्नपूर्णा रसोई योजना

    December 26, 2016
    • राजस्थान सरकार ने राज्य के शहरी क्षेत्रों में श्रमिकों, रिक्शावालों, ठेलेवालों, ऑटोवालों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों, कामकाजी महिलाओं, बुजुर्गों एवं अन्य असहायों, जरूरतमंद व्यक्तियों को ध्यान में रखकर उनकी सेहत के लिए अन्नपूर्णा रसोई योजना की शुरूआत की है।
    • इस योजना का शुभारम्भ मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे द्वारा 15 दिसंबर 2016 को किया गया है। 
    • इस योजना में अन्नपूर्णा रसोई वैन के माध्यम से मात्र रु 5 में नाश्ता तथा मात्र रु 8 में पौष्टिक भोजन उपलब्ध करवाया जा रहा है।
    • योजना के पहले चरण में 12 शहरों में 80 अन्नपूर्णा रसोई वैनों के माध्यम से नाश्ता और भोजन उपलब्ध कराया जाएगा-
    • जयपुर
    • जोधपुर
    • कोटा
    • अजमेर
    • बीकानेर
    • उदयपुर
    • भरतपुर
    • बारां
    • बांसवाड़ा
    • डुंगरपुर
    • प्रतापगढ़
    • झालावाड़

    अन्नपूर्णा रसोई योजना की विशेषताएं

    • इस रसोई वैन में लाभार्थियों के लिए नाश्ता, दोपहर का भोजन एवं रात्रि का भोजन उपलब्ध होगा। योजना में नाश्ता मात्र 5 रुपये में मिलेगा। नाश्ता के रूप में पोहा, सेवइयाँ, इडली साँभर, लापसी, ज्वार खिचड़ा, बाजरा खिचड़ा, गेहूं खिचड़ा आदि मिलेंगे।
    • इस योजना में भोजन की थाली मात्र 8 रुपये में उपलब्ध होगी, जिसमें प्रत्येक भोजन सामग्री की मात्रा 350 ग्राम होगी। भोजन के रूप में दोपहर में दाल-चावल, गेहूं का चूरमा, मक्का का नमकीन खीचड़ा, रोटी का उपमा, दाल- ढ़ोकली, चावल का नमकीन खीचड़ा, कढ़ी-ढ़ोकली, ज्वार का नमकीन खीचड़ा, गेहूं का मीठा खीचड़ा इत्यादि शामिल हैं।
    • योजना में रात्रि भोजन में भी प्रति थाली मात्र 8 रुपये में मिलेगी, जिसमें सामग्री की मात्रा 350 ग्राम होगी, यह सामग्री इस प्रकार है: दाल-ढ़ोकली, बिरयानी, ज्वार की मीठी खिचड़ी, चावल का नमकीन खीचड़ा, कढ़ी-चावल, मक्के का नमकीन खीचड़ा, बेसन गट्टा पुलाव, बाजरे का मीठा खीचड़ा, दाल-चावल, गेहूं का चूरमा इत्यादि।
    • पहले चरण की सफलता के बाद इसे अन्य जिलों व तहसील स्तर पर लागू करना प्रस्तावित है।
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    परिवार कल्याण सेवाओं को प्रभावी बनाने हेतु मिशन परिवार विकास परियोजना

    December 26, 2016

    परिवार कल्याण सेवाओं को प्रभावी बनाने हेतु मिशन परिवार विकास

       जयपुर, 26 दिसम्बर। परिवार कल्याण सेवाओं का प्रभावी संचालन सुनिश्चित करने हेतु ‘मिशन परिवार विकास‘ परियोजना के तहत प्रदेश के 14 जिलों में विशेष कार्ययोजना बनाकर कुल प्रजनन दर सहित विभिन्न परिवार नियोजन मापदंड़ों में सुधार लाया जायेगा। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा युनीसेफ, युएनएफपीए, निपी तथा पाथ फाईन्डरइत्यादि संगठनों के साथ चयनित जिलों में प्रभावी परिवार कल्याण गतिविधियां की जायेगी। मिशन निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने सोमवार को झालाना डूंगरी स्थित राज्य स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण प्रशिक्षण केन्द्र में आयोजित ‘मिशन परिवार विकास‘ की आमुखीकरण कार्यशाला में यह जानकारी दी। 
    • ‘मिशन परिवार विकास‘ में शामिल 14 जिले  धौलपुर, करौली, सवाईमाधोपुर व भरतपुर (भरतपुर संभाग), उदयपुर, डूंगरपुर, राजसमंद, बांसवाड़ा (उदयपुर संभाग), जालोर, बाड़मेर, जैसलमेर, पाली व सिरोही (जोधपुर संभाग) एवं कोटा संभाग के बारां है।
    • केन्द्र द्वारा कुल प्रजनन दर मातृ मृत्यु एवं शिशु मृत्युदर अधिक वाले 14 जिलों को मिशन परिवार विकास में शामिल किया है। 
    • मिशन के तहत् इन जिलों में सभी प्रसव केन्द्रों पर पीपीआईयूसीडी, विशेष नसबंदी प्रोत्साहन राशि, परिवार नियोजन के साधन निरोध व गर्भनिरोधक गोलियां इत्यादि साधनों की सुलभ उपलब्धता एवं वर्ष पर्यन्त व्यापक प्रचार-प्रसार किया जायेगा। 
    • स्वास्थ्यकार्मिकों के लिए विशेष परिवार कल्याण प्रशिक्षण कार्यक्रम के साथ ही जनजागरूकता हेतु ‘सारथी प्रचार रथ अभियान‘, ‘सास-बहू सम्मेलन‘ एवं नवदम्पतियों को ‘परिवार नियोजन‘ किट का आवंटन जैसी विशेष गतिविधियां आयोजित की जायेंगी।
    • मिशन के तहत् गर्भनिरोधक साधनों में ‘अंतरा‘ इंजेक्शन की 4 डोज लगाने की निशुल्क सुविधा मिलेगी। अंतरा इन्जेक्शन का उपयोग करने वाली महिला को एक साल की अवधि तक गर्भधारण रोकथाम के लिए अन्य किसी साधन का उपयोग करने की आवश्यकता नहीं होगी। 
    • पाथ फाउन्डर तकनीकी पार्टनर के रूप में मिशन परिवार विकास में शामिल हो गया है एवं प्रदेश के पाली, सिरोही, बारां, सवाईमाधोपुर एवं भरतपुर जिलों में मिशन गतिविधियों में चिकित्सा विभाग को आवश्यक सहयोग करेेगा।
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    Firewood free village scheme जलाऊ लकड़ी मुक्त ग्राम योजना-

    December 26, 2016




    जलाऊ लकड़ी मुक्त ग्राम योजना-

    टाईगर रिजर्व क्षेत्रों में गैस कनेक्शन वितरण योजना

    ग्रामीण लोग र्इंधन की आवश्यकताओं और प्रायः अपनी आजीविका के लिए भी वन संसाधनों एवं वन उत्पादों पर निर्भर रहते हैं। राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में जलाऊ लकड़ी घरेलू र्इंधन का परम्परागत स्त्रोत रही है, जो प्रायः क्रय नहीं की जाकर संरक्षित क्षेत्रों व वन क्षेत्रों से एकत्रित की जाती रही है। संरक्षित क्षेत्रों और उनके आस-पास के क्षेत्रों से जलाऊ लकड़ी एकत्रित करने से वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास खत्म होता है। इससे वन्यजीव एवं मानव के बीच संघर्ष बढ़़ता है एवं वन्यजीवों तथा स्थानीय लोगों दोनों के लिए संकट उत्पन्न होता है। सबसे अधिक समस्या टाईगर रिजर्व के सन्दर्भ में देखी गई है।
    ग्रामीण क्षेत्रों विशेषतः संरक्षित क्षेत्रों के आस-पास के गांवों में रहने वाली महिलाओं का काफी समय जलाऊ लकड़ी एकत्रित करने में व्यतीत होता है। इस कारण अन्य आय सृजन गतिविधियों एवं गृह कार्यों के लिए उनके पास अपेक्षाकृत कम समय उपलब्ध हो पाता है। चूल्हे के धुएं से महिलाओं के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। आवश्यकता इस बात की है कि इन परिवारों की जलाऊ लकड़ी पर निर्भरता कम करके उन्हें कुकिंग गैस कनेक्शन के रुप में वैकल्पिक र्इंधन उपलब्ध कराया जा। इससे महिलाओं का शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रहेगा पर्यावरण भी अच्छा रहेगा एवं महिलाओं को सामाजिक व आर्थिक सम्बल मिले, जिससे स्थानीय समुदाय सशक्त हो सके।
    गत तीन वर्षों में वन विभाग द्वारा चुनिंदा संरक्षित क्षेत्रों के आस-पास के ग्रामों मे 50 प्रतिशत अनुदान पर गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं। मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे ने वर्ष 2016-17 के अपने बजट भाषण में घोषणा की थी कि टाईगर रिजर्व क्षेत्रों के निकटवर्ती गांवों में नवीन कुकिंग गैस कनेक्शन हेतु वर्तमान में लागत का 50 प्रतिशत अनुदान देय है, जिसे बढ़ाकर 100 प्रतिशत किया जाएगा। आगामी वर्ष में ऎसे 40 हजार गैस कनेक्शन दिये जाने प्रस्तावित है। चालू वित्तीय वर्ष 2016-17 में राज्य के तीनों टाईगर रिजर्व से जुड़े गावों को गैस कनेक्शन से परिपूर्ण कर, उन्हें जलाऊ लकड़ी मुक्त ग्राम घोषित किये जाने का लक्ष्य है।    

    योजना के प्रमुख उद्देश्य -

    • स्थानीय लोगों को वैकल्पिक र्इंधन स्त्रोत उपलब्ध कराना,ताकि जलाऊ लकड़ी के लिए संरक्षित क्षेत्रों एवं वनों पर निर्भरता कम हो और टाईगर रिजर्व में वन्यजीवों के आश्रय स्थल का बेहतर संरक्षण हो सके। 
    • टाईगर रिजर्व एवं उनके आस-पास के क्षेत्र में परिभाषित क्षेत्रों का प्राकृतिक रुप से पुनर्वास करना। 
    • स्वच्छ र्इंधन के उपयोग को बढ़ावा देकर प्रदूषण में कमी लाना। 
    • महिलाओं को चूल्हे के धुएं से उत्पन्न होने वाली स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से छुटकारा दिलाकर उनके स्वास्थ्य में सुधार लाना एवं महिलाओं का आर्थिक एवं सामाजिक उत्थान करना।

    योजना की मुख्य बातें - गैस कनेक्शन पर अनुदान

    • योजना के तहत लक्षित समूह के प्रत्येक परिवार को एक गैस कनेक्शन दिया जायेगा। यदि पूर्व में किसी भी स्त्रोत से गैस कनेक्शन सुविधा प्राप्त है तो उस परिवार को नया गैस कनेक्शन नहीं दिया जाएगा। 
    • प्रति गैस कनेक्शन लागत सम्बन्धित जिला रसद अधिकारी से निर्धारित कराई जाएगी, जिसमें 14.2 किग्रा सिलेण्डर व रेग्युलेटर की प्रतिभूति राशि, सिलेण्डर में भरी गैस, चूल्हा लाईटर,सुरक्षा होज, गैस डायरी की लागत तथा प्रशासनिक व संस्थापन प्रभार (यदि कोई लागू हो) शामिल किया जाएगा। योजना के अंतर्गत गैस कनेक्शन की शत-प्रतिशत वास्तविक लागत राशि अनुदान के रुप में उपलब्ध कराई जायेगी, परंतु यह किसी भी दशा में एक कनेक्शन के लिए 5 हजार रुपये से अधिक नहीं होगी। 
    • गैस कनेक्शन के रखरखाव एवं गैस सिलेण्डर को समय-समय पर भरवाने का व्यय स्वयं लाभार्थी द्वारा वहन किया जाएगा। 
    • लक्षित गांव में रहने वाले सभी परिवार,चाहे वे कैसी भी आर्थिक स्थिति में हो,योजनान्तर्गत लाभ प्राप्त करने के पात्र होेंगे। 
    • परिवार की महिला के नाम जारी होगा कनेक्शन - गैस कनेक्शन परिवार की महिला सदस्य के नाम जारी किया जाएगा, परन्तु जिस परिवार में कोई महिला सदस्य न हो वहां गैस कनेक्शन पुरुष सदस्य के नाम जारी किया जायेगा। 
    • वर्ष 2016-17 में प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के अंतर्गत इस योजना के लक्षित गांवो में लाभान्वित किए जा रहे परिवारों को दोनों योजनाओं में देय अनुदान राशि की अंतर राशि, वास्तविक लागत की सीमा तक स्वीकृत की जाएगी।
    • गैस कनेक्शन लक्षित गांवो मेें ही उपयोग में लिया जायेगा और यह अहस्तान्तरणीय होगा। इसके उपयोग का स्थान भी नहीं बदला जा सकेगा, परन्तु टाईगर रिजर्व से बाहर  होने वाले परिवार इसे अपने साथ नए स्थान पर ट्रान्सफर करा सकेंगे। 
    • यदि किसी लाभार्थी को भविष्य में गैस कनेक्शन की आवश्यकता नहीं रहे या उसका कनेक्शन रद्द हो जाए तो वह अपना कनेक्शन गैस एजेन्सी को समर्पित करेगा। गैस एजेन्सी का दायित्व होगा कि समर्पित गैस कनेक्शन की प्रतिभूति राशि का रिफण्ड बाघ संरक्षण फाउण्डेशन व उप वन संरक्षक को प्राप्त हो, न कि लाभार्थी को।
    • राजस्थान के आठ जिलों में जलाऊ लकड़ी मुक्त ग्राम योजना लागू की गई है। 
    • वर्तमान में यह योजना सवाईमाधोपुर, कोटा, अलवर, करौली, टोंक, बूंदी, झालावाड़ व चितौडग़ढ जिले में लागू की गई है। 

    योजना का क्रियान्वयन -

    • यह योजना वन विभाग द्वारा बाघ संरक्षण फाउण्डेशन पारिस्थितिकीय विकास समिति के माध्यम से क्रियान्वित की जाएगी। परन्तु ऎसे गांव जिनके लिए ऎसी फाउण्डेशन या समिति गठित नहीं है, वहां पात्र परिवार को विभाग व फाउण्डेशन द्वारा ग्राम पंचायत के माध्यम से लाभान्वित किया जाएगा।
    • उप वन संरक्षक द्वारा लक्षित गांवो की सूची तैयार की जाएगी जिसे सार्वजनिक कर संबंधित पारिस्थितिकीय विकास समिति व ग्राम पंचायत व पंचायत समिति व जिला रसद अधिकारी को उपलब्ध कराया जायेगा। 
    • संबंधित टाईगर रिजर्व के लिए निर्धारित लक्ष्यों के प्रकाश में, उप वन संरक्षक सूची में शामिल गांवों का प्राथमिकता के आधार पर वर्गीकरण कर सकेंगे ताकि टाईगर रिजर्व के लिए उच्च प्राथमिकता वाले गांव पहले लाभान्वित हो सकें। 
    • जिस किसी गांव में योजना क्रियान्वित की जाए उसके समस्त इच्छुक परिवार एक साथ लाभान्वित हो सकें। इस वर्गीकरण में टाईगर रिजर्व से विस्थापित किए जा रहे गांवो को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।  
    • पारिस्थितिकीय विकास समिति व ग्राम पंचायत प्रत्येक पात्र परिवार को "कुल्हाडी बंद’’ का संकल्प करायेगी। गैस कनेक्शन प्राप्त करने के इच्छुक परिवार इस ’’कुल्हाडी बंद’’ संकल्प पत्र के साथ पारिस्थितिकीय विकास समिति व ग्राम पंचायत को गैस कम्पनी द्वारा निर्धारित प्रपत्र में आवेदन प्रस्तुत करेंगे। 
    • पारिस्थतिकीय विकास समिति इच्छुक परिवारों द्वारा प्रस्तुत आवेदन का संबंधित गैस ऎजन्सी के सहयोग से सत्यापन कर उनकी संकलित सूची मय आवेदन पत्र क्षेत्रीय वन अधिकारी को गैस कनेक्शन स्वीकृत करने हेतु प्रेषित करेगी। 
    • योजना में जहां परिस्थितिकीय विकास समितियां गठित नहीं है वहां यह सत्यापन कार्य संबंधित ग्राम पंचायत द्वारा किया जाएगा। क्षेत्रीय वन अधिकारी अपनी सिफारिश के साथ बाघ संरक्षण फाउण्डेशन एवं उप वन संरक्षक को गैस कनेक्शन स्वीकृत करने हेतु प्रस्ताव प्रेषित करेगा। 
    • उप वन संरक्षक द्वारा स्वीकृति उपरांत पात्र परिवारों की सूची गैस कनेक्शन जारी करने हेतु संबंधित गैस ऎजन्सी को भेजी जाएगी जो संबंधित परिवारों को गैस कनेक्शन पारिस्थितिकीय विकास समिति व ग्राम पंचायत(जैसी भी स्थिति हो) तथा क्षेत्रीय वन अधिकारी की उपस्थिति में वितरण करेगी। 
    • गैस एजेन्सी का यह दायित्व होगा कि वह योजना के प्रत्येक लाभार्थी परिवार को गैस के उपयोग और सुरक्षा संबंधी आवश्यक जानकारी तथा प्रशिक्षण प्रदान करें। 
    • बाघ संरक्षण फाउण्डेशन व उप वन संरक्षक गैस ऎजन्सी द्वारा प्रस्तुत बिल (जो संबंधित पारिस्थितिकीय विकास समिति व ग्राम पंचायत से सत्यापित होगा) के आधार पर योजनान्तर्गत देय अनुदान राशि संबंधित गैस ऎजन्सी को सीधे ही जारी करेंगे। लाभार्थी को कोई नकद भुगतान नहीं किया जाएगा।

    योजना की मॉनिटरिंग -  

    संबंधित टाईगर रिजर्व के लिए जिला कलक्टर की अध्यक्षता में गांवो के स्वैच्छिक विस्थापन हेतु गठित जिला स्तरीय क्रियान्वयन समिति द्वारा समय-समय पर इस योजना की क्रियान्विति की भी समीक्षा की जायेगी और योजना के विभिन्न सहभागियों के मध्य समन्वय स्थापित करते हुए योजना का जिले में प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा।

    योजना का मूल्यांकन  -

    योजना के क्रियान्वयन एवं उसके प्रभाव को जानने के लिए वर्ष 2016-17 की समाप्ति पर योजना का मूल्यांकन कराया जायेगा। यह मूल्यांकन आयोजना विभाग के मूल्याकंन निदेशालय अथवा किसी बाह्य ऎजेन्सी के माध्यम से कराया जायेगा। योजना के मूल्याकंन में रेण्डम सैम्पलिंग पद्धति अपनाई जाएगी। इस योजना में वितरित किये गैस कनेक्शनों का भौतिक सत्यापन, लाभान्वित परिवारों द्वारा गैस कनेक्शन के निरन्तर उपयोग का मूल्याकंन गैस कनेक्शन के उपयोग से टाईगर रिजर्व पर हुए प्रभाव का मूल्याकंन, गैस कनेक्शन योजना से महिलाओं के स्वास्थ्य व जीवन स्तर में हुए सुधार की मूल्याकंन प्रक्रिया अपनाई जायेगी।

    योजना का वित्त पोषण   -

    योजना का वित्त पोषण पूर्णतः कैम्पा फण्ड से किया जायेगा। योजनान्तर्गत वर्ष 2016-17 में 40 हजार गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए जायेगें जिसके लिए कैम्पा फण्ड की कार्य योजना वर्ष 2016-17 में 20 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
    Firewood free village scheme जलाऊ लकड़ी मुक्त ग्राम योजना- Firewood free village scheme जलाऊ लकड़ी मुक्त ग्राम योजना- Reviewed by asdfasdf on December 26, 2016 Rating: 5

    Co-operative Schemes and Major Co-operative Institutions in Rajasthan - राजस्थान में सहकारिता की योजनाएँ एवं प्रमुख सहकारिता संस्थाएं

    December 24, 2016

    राजस्थान में सहकारिता का इतिहास करीब एक शताब्दी पुराना है। समय गुजरने के साथ-साथ सहकारी संस्थाएं लगातार मजबूत होती गई। आज स्थिति यह है कि सहकारिता आंदोलन से किसान और ग्रामीणों के साथ-साथ शहरी समुदाय भी लाभान्वित होने लगा है। सहकारिता आंदोलन की इससे बड़ी उपलब्धि और क्या हो सकती है कि आज बड़ी संख्या में महिलाएं भी सहकारिता से जुड़ रही हैं। महिला कल्याण में सहकारिता आंदोलन की बड़ी भूमिका है। करीब साढ़े चार हजार विभिन्न सहकारी संस्थाओं से जुड़कर महिलाएं अपना और अपने आसपास के लोगों का जीवन बेहतरी की ओर मोड़ चुकी हैं। आज गांवों में ही नहीं, बल्कि शहरों में भी सहकारी संस्थाओं ने अपनी पहचान बनाई है। दैनिक उपयोग की वस्तुओं के लिए जहां उपभोक्ता भण्डारों के प्रति लोगों में विश्वास है, वहीं बीमारी की स्थिति में उपभोक्ता दवा केन्द्र आमजन और पैंशनर्स के लिए एक मिशन की तरह काम कर रहे हैं। सहकारिता का सिद्धान्त परस्पर सहयोग की भावना पर आधारित है, जिसका मूल मंत्र है ’’एक सबके लिए-सब एक के लिए’’।
    • राजस्थान में सबसे पहले वर्ष 1904 में अजमेर में सहकारिता की शुरुआत हुई, इसके बाद भरतपुर में 1915, कोटा में 1916, बीकानेर में 1926, अलवर में 1934, किशनगढ़ में 1935, जोधपुर में 1938 और जयपुर में वर्ष 1944 में सहकारिता का कानून अस्तित्व में आया। 
    • राज्य में 1965 का सहकारिता अधिनियम अस्तित्व में था। 
    • बदलते आर्थिक परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए सहकारी संस्थाओं को और अधिक स्वायत्तता देने और निष्पक्ष और समयबद्ध चुनाव आदि के लिए 14 नवम्बर, 2002 से राज्य का नया सहकारिता अधिनियम एवं 2009 में नए नियम अस्तित्व में आए। 
    • भारतीय संविधान के 97वें संशोधन प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए 24 अप्रेल, 2013 को सहकारिता अधिनियम में आवश्यक संशोधन किए गए। 
    • राज्य की सहकारी संस्थाओं को मजबूती प्रदान करने एवं बिना हस्तक्षेप के स्वतंत्रतापूर्वक दायित्वों के निर्वहन के लिए राज्य में 4 अक्टूबर, 2016 से राजस्थान सहकारी सोसायटी (संशोधन) अधिनियम, 2016 लागू किया है। 
    • राज्य में 29 केन्द्रीय सहकारी बैंकों द्वारा 6 हजार से अधिक ग्राम सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से समिति के सदस्य किसानों को फसली सहकारी ऋण (Co-operative loan) उपलब्ध कराया जाता है। काश्तकारों को उनकी स्वीकृत साख सीमा तक सहकारी किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से फसली सहकारी ऋण वितरित किया जाता है। 
    • इसी प्रकार राज्य के सहकारी भूमि विकास बैंकों के माध्यम से कृषि कार्यों के लिए वितरित दीर्घकालीन सहकारी ऋणों (Co-operative loans) के ब्याज पर राज्य सरकार द्वारा पांच प्रतिशत ब्याज अनुदान देने के निर्देश जारी किए गए हैं। 
    • राज्य के 36 प्राथमिक सहकारी भूमि विकास बैंकों द्वारा काश्तकारों को 12.8 प्रतिशत तक ब्याज दर पर दीर्घकालीन सहकारी ऋण (Long term co-operative loan) उपलब्ध कराए जाते थे, जो अब 8.5 प्रतिशत तक पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त बैंकों द्वारा ऋणी काश्तकारों से ऋण चुकाने के समय पांच प्रतिशत कम ब्याज वसूला जा रहा है। 
    • राज्य के 36 सहकारी भूमि विकास बैंकों के माध्यम से काश्तकारों को लघु सिंचाई साधनों में नया कुआं बनाने, कुआं गहरा कराने, नलकूप, पंपसैट, फव्वारा व बूंद-बूंद सिंचाई, कुएं पर विद्युतीकरण, नाली निर्माण, हौज व डिग्गी निर्माण आदि के लिए ऋण दिया जाता है। 
    • इसके साथ ही कृषि यंत्रीकरण में टे्रक्टर, थ्रेशर, कंबाइन हार्वेस्टर के साथ ही डेयरी, भूमि सुधार, भूमि समतलीकरण, खेती के लिए जमीन खरीदने, ग्रामीण गोदाम निर्माण, वर्मी कपोस्ट, भेड़-बकरी-सुअर-मुर्गी पालन, बागवानी और ऊंट व बैलगाड़ी आदि के लिए सहकारी भूमि विकास बैंकों से ऋण दिया जाता है। 
    • प्रदेश में ग्राम सेवा सहकारी समितियों को कार्यालय व गोदाम निर्माण के लिए दस-दस लाख रुपए प्रति समिति उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसी तरह से दस करोड़ की लागत से जीर्ण-शीर्ण गोदामों की मरम्मत का काम भी कराया जा रहा है।  इससे गांव में ही किसानों के लिए खाद-बीज का अग्रिम भण्डारण, कृषि उपज की खरीद कर भण्डारण और उपभोक्ता सामग्री के वितरण के लिए भण्डारण की व्यवस्था उपलब्ध हो रही है, जिसका सीधा लाभ किसान और ग्रामीणों को हो रहा है। 
    • सहकारिता विभाग द्वारा विकेन्द्रीकृत खरीद व्यवस्था में गेहूं की खरीद का भुगतान सीधे काश्तकार के खाते में करते हुए उसी दिन संबंधित काश्तकार को एसएमएस के माध्यम से जानकारी देने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। किसानों की सुविधा के लिए ग्राम सेवा सहकारी समितियों में भी खरीद केन्द्र स्थापित किए जाने लगे हैं, जिनमें कप्यूटरीकृत व्यवस्था के तहत हाथों-हाथ पंजीयन की सुविधा भी है। 
    • इसके साथ ही राजफैड और तिलम संघ के खरीद केन्द्रों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की व्यवस्था भी की गयी है। गांवों में सरकार की तमाम योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए सहकारी संस्थाओं का बड़ा सहयोग रहता है। 
    • भामाशाह, जनधन योजना, मनरेगा सहित विभिन्न पेंशन व नकद हस्तातंरण योजनाओें का लाभ सहकारी बैंकों के माध्यम से उपलब्ध कराने के लिए राज्य में लगभग 7 हजार 489 ई-मित्र केन्द्रों को केन्द्रीय सहकारी बैंकों का बिजनेस कोरेस्पोंडेंट बनाया जा चुका है। सहकारी बैंकों की सभी शाखाओं को कोर बैंकिंग प्लेटफार्म पर लाने के बाद अब ग्राम सेवा सहकारी समितियों के कप्यूटरीकरण के काम को गति दी जा रही है। 
    • इसके अतिरिक्त राज्य सरकार के वित्तीय सहयोग से सात सौ से अधिक पेक्स में कप्यूटरीकरण का काम जारी है।
    •  शहरी जनता को उपभोक्ता सामग्री उचित दरों पर उपलब्ध कराने के लिए जिलों में 3-3 पेक्स में सुपर मार्केट व हर जिले में एक-एक महिला सुपर मार्केट खोले जा रहे हैं। उपभोक्ता भंडाराें और इन सुपर मार्केट्स के जरिए जैविक उत्पादों के बिक्री केन्द्र शुरु करने की कार्ययोजना को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है। 
    • राज्य में आदिवासी क्षेत्र में लेम्पस को ग्रामीण आर्थिक गतिविधियों के प्रमुख केन्द्र के रुप में विकसित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने उदयपुर संभाग के सरकार आपके द्वार के दौरान टामटिया लेम्पस की गतिविधियों के अवलोकन के बाद संभाग की तीस लेम्पस को आर्थिक गतिविधियों के केन्द्र के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए थे। इसके साथ ही सभी लेम्पस को भामाशाह योजना के क्रियान्वयन के लिए बीजनेस कोरेस्पोंडेंट बनाने के निर्देश दिए थे। 
    • आजादी के समय राज्य में 2669 सहकारी समितियां कार्यरत थी और केवल एक प्रतिशत ग्रामीण परिवार ही सहकारिता के दायरे में थे। आज राज्य में 33 हजार से ज्यादा सहकारी समितियों के करीब एक करोड़ से अधिक सदस्य हो गए हैं। राज्य की सहकारी संस्थाओं की हिस्सा राशि 3396 करोड़ रुपए हो गई है। राज्य की सहकारी संस्थाएं लगभग 62 हजार करोड़ रुपए की कार्यशील पूंजी से देश के आर्थिक विकास में हिस्सेदारी निभा रही हैं।  
    सहकारिता से संचालित प्रमुख योजनाएं -

    ज्ञान सागर योजना -  

    राजस्थान स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक की केन्द्रीय सहकारी बैंकों के माध्यम से संचालित होने वाली ज्ञान सागर योजना में दूर ढाणी में बैठे काश्तकार के बेटे-बेटियों से लेकर शहरों में निवास करने वाले उच्च अध्ययन के इच्छुक युवा ऋण सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। इसके तहत देश व प्रदेश में उच्च एवं तकनीकी अध्ययन के लिए तीन लाख रुपये और विदेश में अध्ययन के लिए पांच लाख रुपये तक का ऋण दिया जा सकेगा। ज्ञान सागर योजना में छात्र-छात्राओं के साथ ही वेतन भोगी एवं व्यवसायी भी उच्च शिक्षा के लिए ऋण प्राप्त कर सकते हैं। महिला शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्धेश्य से आधा प्रतिशत कम ब्याज लेने का निर्णय किया गया है। 

    ज्ञान सागर योजना में तकनीकी, व्यावसायिक, इन्जीनियरिंग, आई.टी.आई., मेडिकल, होेटल मैनेजमेन्ट, एम.बी.ए.कम्प्यूटर, आदि विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए ऋण (Loan) प्राप्त किया जा सकता है। महिला शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्धेश्य से आधा प्रतिशत कम ब्याज लेने का निर्णय किया गया है। दो लाख रुपये तक के ऋण पर साढ़े ग्यारह प्रतिशत और अधिक के ऋण पर बारह प्रतिशत की दर से ब्याज लिया जायेगा। योजना का उद्धेश्य आर्थिक अभाव से शिक्षा से वंचित लोगों को शिक्षा के पूरे अवसर उपलब्ध कराना है।

    सहकार स्वरोजगार योजनाः  

    कृषि, अकृषि एवं सेवा क्षेत्र में स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सहकारी बैंकों द्वारा यह योजना शुरू की गई है । इस योजना में विभिन्न प्रयोजनों के लिए अधिकतम दो लाख रुपए तक का ऋण दो व्यक्तियों को जमानत पर दिया जा रहा है। 25 हजार रूपये तक के ऋणों पर कालेटरल सिक्योरिटी भी नहीं ली जाती है । ऋणों का चुकारा मासिक, त्रैमासिक या अर्द्धवार्षिक किश्तों में किया जा सकता है ।

    जनमंगल आवास ऋण योजना (Janamangal Housing Loan Scheme) - 

    पचास हजार से अधिक आबादी वाले शहरों और कस्बों में मकान खरीदने या बनाने के लिए 25 हजार से 5 लाख तक का ऋण उपलब्ध कराने के लिए जनमंगल आवास ऋण योजना शुरू की गई है । योजना में दुकानों, गोदाम, शोरूम के निर्माण के साथ ही रिहायशी मकानों या दुकानों की अभिवृद्धि या मरम्मत के लिए भी ऋण सुविधा उपलब्ध है। इस ऋण योजना में राज्य सरकार, अर्द्ध सरकारी संस्थाओं, स्वयंसेवी संस्थाओं एवं निजी क्षेत्र के स्थायी कर्मचारी या तीन वर्ष से आयकर सारणी भरने वाले गैर कर्मचारी वर्ग के व्यक्ति भी ऋण प्राप्त कर सकते है । यह ऋण तीन किश्तों में किया जायेगा ।

    नकद ऋण वितरण व्यवस्था (Cash credit delivery system)-

    दीर्घकालीन सहकारी ऋण वितरण व्यवस्था से बिचौलियों को हटाने के लिए नकद ऋण वितरण व्यवस्था शुरू की गई है। योजना के अनुसार ट्रेक्टर व लघुपथ परिवहनों को छोड़कर शेष कृषि यंत्रों, पम्पसैट, स्प्रिंन्कलर, अन्य मशीनरी उपकरणों व संयत्रों की खरीद के लिए भूमि विकास बैंकों द्वारा अब सीधे किसानों को चैक किया जाता है। किसान स्वयं अपनी पसंद के मेक व फर्म से तत्संबंधी यंत्र खरीद कर 15 दिवस में खरीद प्रस्तुत कर ऋण से खरीदी गई वस्तु का भौतिक सत्यापन कर सकता है ।इस योजना का  प्रदेश के सभी 36 प्राथमिक सहकारी भूमि विकास बैंकों से ऋण प्राप्त करने वाले ग्रामीण लाभ उठा सकते हैं ।

    महिला विकास ऋण योजना (Women development credit scheme)-

    राज्य के 36 प्राथमिक भूमि विकास बैंकों के कार्यक्षेत्र में रहने वाली महिलाओं को बिना अचल सम्पत्ति गिरवी रखे ऋण सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था महिला विकास ऋण योजना में की गई है। इस योजना में महिलाओं को कुटीर व ग्रामीण उद्योग धन्धों, छोटे-मोटे रोजगार के साधनों, कपड़े, मसाले, बुनाई, पापड, मंगोडी, जरी, चमड़े आदि के कार्यों के लिए 50 हजार रुपए तक का ऋण दिया जाता है। ऋण राशि को तीन माह की ग्रेस अवधि सहित पांच वर्षों में चुकाने की सुविधा है ।

    विफल कूप क्षतिपूर्ति योजना -


    प्राथमिक सहकारी भूमि विकास बैंकों से ऋण प्राप्त कर कुंए खुदवाने पर उनके उद्देश्यों में विफल होने की स्थिति में काश्तकारों को राहत देने के उद्देश्य से विफल कूप क्षतिपूर्ति योजना चलाई जा रही है । योजना के अन्तर्गत ऋणी सदस्यों को उनकी और बकाया राशि के मूलधन की पचास प्रतिशत राशि की क्षतिपूर्ति की जाती है । शेष पचास प्रतिशत राशि की ब्याज का वहन ऋणी सदस्य को करना होता है ।

    ग्रामीण दुर्घटना बीमा योजना (Rural accident insurance scheme)-


    प्राथमिक सहकारी भूमि विकास बैंकों के ऋणी सदस्यों की दुर्घटना में स्थाई अपंगता या मृत्यु होने पर राहत देने के उद्देश्य से बीमा कंपनियों के सहयेाग से दुर्घटना बीमा योजना सुविधा उपलब्ध है । दुर्घटना बीमा योजना में ऋणी सदस्य की दुर्घटनावंश मृत्यु होने पर 25 हजार रूपये की वित्तीय सहायता दी जाती है । ऋणी सदस्य की दुर्घटनाहोने की स्थिति में 15 दिवस में एवं मृत्यु होने की स्थिति में 30 दिवस में क्षेत्र की भूमि विकास बैंक एवं बीमा कम्पनी की निकटतम शाखा में सूचना देनी होती है।

    ग्रामीण आवास योजना -

    ग्रामीण जीवन में गुणात्मक सुधार लाने के उद्देश्य से 50 हजार तक की आबादी वाले कस्बों एवं गांवों में काश्तकारों की पक्के मकान बनाने के लिए आवास ऋण सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। ग्रामीण आवास योजना में पुराने मकानों की मरम्मत, परिवर्तन पर परिवर्द्धन के लिए भी ऋण सुविधा दी जाती है। राज्य सहकारी आवासन संघ द्वारा व्यक्तिगत आवास ऋण योजना (Personal housing loan scheme) शुरू की गई। जिसमें मकान/फ्लेट बनाने, खरीदने या उसके विस्तार के लिए अधिकतम पांच लाख रुपए तक के ऋण दिए जाते हैं।

    व्यक्तिगत आवास ऋण योजना (Personal housing loan scheme) -


    राज्य सहकारी आवासन संघ द्वारा में व्यक्तिगत आवास ऋण योजना शुरू की गई । योजना में मकान/फ्लेट बनाने, खरीदने या उसके विस्तार के लिए अधिकतम पाॅंच लाख रूपये तक के ऋण दिये जाते हैं । 65 वर्ष की आयु तक के स्थाई नौकरी करने वाले तथा निजी व्यवसाय व्यक्तिगत ऋण सुविधा (Personal loan facility) का लाभ उठा सकते हैं ऋण तीन किश्ते में दिया जाता है और 15 वर्षों में आसान किश्तों में ऋण ब्याज तथा ऋण चुकाने की सुविधा दी गई है।

    बेबी ब्लैंकेट योजना -

    मकानों की मरम्मत, परिवर्तन व परिवर्द्धन के लिए 50 हजार रूपये तक के ऋण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राजस्थान राज्य सहकारी आवासन संघ द्वारा बेबी ब्लैंकेट योजना चलाई जा रही है । योजना में मकान की मरम्मत, रंग रोगन, प्लास्टर, फर्श बनवाने या बदलवाने, बिजली या पानी की लाइनों को बदलने या मरम्मत करवाने दवाजे खिड़की या अन्य इसी तरह के कार्यों के लिए ऋण उपलब्ध कराये जाते हैं । पांच वर्ष की अवधि के लिए उपलब्ध कराये जाते है व ये ऋण दो किश्तों में बांटे जाते हैं और समान मासिक किश्तों में मय ब्याज चुकाने की सुविधा है।

    सहकारी किसान कार्ड -


    किसानों को आसानी से सहकारी कर्जें उपलब्ध कराने के उद्देश्य से समूचे देश में सबसे पहले सहकारी क्षेत्र में राजस्थान में 29.1.1999 को सहकारी किसान कार्ड योजना लागू की गई । इसी क्रम में ग्राम सेवा सहकारी समितियों के समस्त ऋणी सदस्यों को ”सहकारी किसान कार्ड“ सुविधा से जोडा जा चुका है। राज्य सरकार के इस निर्णय से अब ग्राम सेवा सहकारी समिति के सदस्य किसान सीधे बैंक से चैक प्रस्तुत कर अपनी कृषि संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु इच्छानुसार ऋण प्राप्त कर सकते हैं । इसी तरह से समिति में खाद बीज, डीजल आदि उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में क्षेत्र की क्रय विक्रय सहकारी समिति से खाद बीज आदि भी प्राप्त कर सकते हैं । राज्य सरकार की बजट घोषणा के क्रम में वर्ष 2010-11 में पांच लाख नए सदस्यों को सहकारी ऋण वितरण व्यवस्था से जोड़ा जा रहा है। इसमें नए काश्तकारों को सहकारी किसान क्रेडिट कार्ड भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

    सहकार सुगम क्रेडिट कार्ड -


    लघु उद्यमियों, छोटे व्यापारियों आदि को आसानी से साख सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सुगम क्रेडिट कार्ड योजना शुरू करने की घोषणा की थी । सहकार सुगम क्रेडिट कार्ड योजना में लघु उद्यमियों, छोटे व्यवसाईयों, पारम्परिक कारोबार करने वालों, दस्तकारों व युवाओं को रोजगार के संचालन के लिए पचास हजार रूपये तक की साख सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। 25 हजार रूपये तक की साख सुविधा के लिए कोलेटरल सिक्योरिटी की भी आवश्यकता नहीं है । अब इस योजना का नाम स्वरोजगार क्रेडिट कार्ड योजना कर दिया गया है।

    कृषक मित्र योजना -


    राज्य में नकदी फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने और छोटे बड़े सभी काश्तकारों को सहकारी दायरे में लाने के उद्देश्य से अगस्त 1997 से कृषक मित्र सहकारी ऋण योजना (Farmer friend co-operative loan scheme) शुरू की गई है । योजना को सफल बनाते हुए अब चार एकड से अधिक सिंचित कृषि योग्य भूमि वालेू काश्तकारों को उनकी स्वीकृत साख सीमा के अनुसार दो लाख रूपये तक के फसली कर्जें वितरित किये जा सकते हैं। हाल ही में सामान्य क्षेत्र में साढ़े तीन लाख रुपए एवं नहरी क्षेत्रों के किसानों को अधिकतम चार लाख तक के ऋण उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है इस योजना के लागू होने से छोटे बड़े सभी काश्तकार सहकारी छाते में बनाकर एक ही स्थान से ऋण जरूरतों की पूर्ति कर सकते हैं। इस योजना में एक जुलाई से 31 जून तक की अवधि के लिए साख सीमा स्वीकृत की जाती है और सहकारी किसान कार्ड से स्वीकृत साख सीमा तक ऋण सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। तीन लाख रुपए तक के ऋण सात प्रतिशत ब्याज दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है।

    सहकार प्रभा योजना -


    कृषि, अकृषि एवं फसली सहकारी ऋणों के लिए एक बारीय साख सीमा का निर्धारण कर ऋण स्वीकृति व वितरण में विलम्ब को समाप्त करने के उद्देश्य से सहकारी भूमि विकास बैंकों द्वारा सहकार प्रभा योजना की शुरूआत की गई है । दो एकड कृषि योग्य भूमि वाले, अवधिपार सहकारी ऋणों के दोषी नहीं होने वाले कृषक इस योजना का लाभ उठा सकते है । इस योजना में फसली कार्यों के लिए एक वर्ष के लिए व अन्य ऋण अधिकतम 15 वर्ष की अवधि के लिए दिये जा सकेंगे।

    प्रमुख सहकारी संस्थाएं-  

    राजस्थान राज्य सहकारी बैंक Rajasthan State Cooperative Bank -

    राजस्थान राज्य सहकारी बैंक की स्थापना 14 अक्टूबर, 1953 को ग्रामीण एवं कृषक समुदाय को अल्पकालीन कृषि ऋण, गैर कृषि ऋण, रोजगारोन्मुख योजनाओं के लिए ऋण उपलब्ध कराने के लिए की गई है। बैंक 29 केन्द्रीय सहकारी बैंकों एवं 6476 ग्राम सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से काश्तकारों को सेवाएं देने के लिए प्रतिबद्धता से काम कर रहा है।  

    राजस्थान राज्य भूमि विकास बैंक Rajasthan State Land Development Bank - 

    राजस्थान राज्य भूमि विकास बैंक की स्थापना 26 मार्च 1957 को हुई। ग्रामीण साख के क्षेत्र में राज्य भूमि विकास बैंक द्वारा 36 प्राथमिक भूमि विकास बैंकों एवं उनकी 133 शाखाओं के माध्यम से दीर्घकालीन ऋण वितरण किया जा रहा है।  

    राजस्थान राज्य क्रय-विक्रय सहकारी संघ - 

    राजस्थान राज्य क्रय-विक्रय सहकारी संघ (राजफैड) की स्थापना 26 नवम्बर, 1957 को हुई थी। 249 क्रय-विक्रय सहकारी समितियों के माध्यम से भारत सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर तथा वाणिज्यिक आधार पर कृषि उपज की खरीद कर बिचौलियों से राहत प्रदान करने का काम किया जा रहा है।  

    राजस्थान राज्य सहकारी उपभोक्ता संघ -

    राजस्थान राज्य सहकारी उपभोक्ता संघ की स्थापना 23 मार्च 1967 को हुई थी। इसके द्वारा राज्य के विभिन्न जिलों में स्थित सहकारी संस्थाओं से अधिकृत डीलर के माध्यम से अनियंत्रित वस्तुओं का व्यवसाय कर राज्य के उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा की जाती है।

    राजस्थान राज्य सहकारी मुद्रणालय लिमिटेड,जयपुर - 


    राजस्थान राज्य सहकारी मुद्रणालय लिमिटेड,जयपुर एक राज्य स्तरीय शीर्ष सहकारी संस्था है, जिसका उद्देश्य सदस्य व असदस्य सहकारी संस्थाओं व सरकारी विभागों में प्रयोगार्थ सामग्री का मुद्रण कार्य करना है। इस मुद्रणालय की स्थापना वर्ष 1960 में हुई थी। राज्य सरकार ने मुद्रणालय के कार्य की विशिष्टताओं को देखते हुए इस मुद्रणालय को राज्य केन्द्रीय मुद्रणालय के समकक्ष दर्जा प्रदान कर राज्य के सभी विभागों को इस मुद्रणालय से मुद्रणकार्य करवाने के लिये अधिकृत किया है। वर्तमान में इस सहकारी मुद्रणालय में एच.एम.टी. लि0 से क्रय की गई की दो टू कलर ऑफसेट प्रिंटिंग मशीन सहित कुल सात ऑफसेट प्रिंटिंग मशीनें, आठ कम्प्यूटर सिस्टम, कैमरा, प्लेट मेकिंग, सीटी पोलीजेट सिस्टम सहित इत्यादि आधुनिक उपकरण स्थापित है।

    राजस्थान राज्य सहकारी संघ, जयपुर -


    राजस्थान राज्य सहकारी संघ की स्थापना 21 दिसम्बर, 1957 को हुई थी। यह एक राज्य स्तरीय शीर्ष एवं प्रवक्ता सहकारी संस्था है। इस संस्था का गठन सहकारी संस्था अधिनियमान्तर्गत है, जिसका उद्धेश्य राज्य के सहकारी आन्दोलन को प्रतिनिधित्व प्रदान करना है। इस हेतु यही एक मात्र राज्य स्तरीय वैधानिक संस्था है।
    राज्य सहकारी संघ का मुख्य उद्धेश्य सहकारी शिक्षण प्रशिक्षण एवं प्रचार प्रसार है एवं राज्य सरकार द्वारा  एवं भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ, नई दिल्ली द्वारा सौपें गये दायित्व  का पालन करना है। सहकारी शिक्षा कार्यक्रम के अन्तर्गत वर्तमान में संघ द्वारा चार सहकारी शिक्षा क्षेत्रीय परियोजनाएं क्रमशः जयपुर, अजमेर, जोधपुर व सवाई माधोपुर में संचालित है तथा सहकारी प्रशिक्षण कार्यक्रम के अन्तर्गत सहकारी प्रशिक्षण केंद्र, जयपुर संचालित है। सहकारी शिक्षण कार्यक्रम का उद्धेश्य राज्य के सहकारी संस्थाओं (यथा केंद्रीय सहकारी बैंक , प्राथमिक सहकारी भूमि विकास बैंक, क्रय-विक्रय सहकारी समितियां, उपभोक्ता भंडार, ग्राम सेवा सहकारी समितियां, लैम्पस, डेयरी, महिला सहकारी बचत समितियां एवं स्वयं सहायता समूह) के पदाधिकारियों सदस्यों को सहकारी सिद्धांतों, सहकारी नियम, उपनियम,संचालक मण्डल के अधिकार एवं कर्तव्य, सहकारी साख व विपणन आदि के बारे में जानकारी के साथ-साथ सहकारी नवाचारों के बारे में भी शिक्षण-प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाता है तथा प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत पैक्स एवं सी.सीबी., पी.एल.डी.बी., मार्केटिगं एवं उपभोक्ता भण्डारों के  कार्मिकों को प्रशिक्षित किया जाता है। इस सहकारी शिक्षण प्रशिक्षण के माध्यम से सहकारी संस्थाएं जागरुक होकर राज्य के सहकारी आंदोलन को सफल बनाने में अपना योगदान कर सके।
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    राजस्थान में सार्वजनिक वितरण प्रणाली तथा 'खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग'

    December 23, 2016

     राजस्थान में सार्वजनिक वितरण प्रणाली एवं खाद्य 

    एवं नागरिक आपूर्ति विभाग

    • राज्य के सभी श्रेणी के परिवारों यथा- बीपीएल, एपीएल, अन्त्योदय आदि के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली का क्रियान्वयन राज्य में आरम्भ से ही किया जा रहा है।
    • देश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली का उद्गम 1960 के दशक में हुई खाद्यान्नों की अत्यधिक कमी हो जाने से कमी वाले शहरी क्षेत्रों में खाद्यान्नों का वितरण करने पर ध्यान केन्द्रित करके हुआ था। 
    • इसके बाद हरित क्रांति के अंतर्गत चूंकि राष्ट्रीय कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई थी, इसलिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली का विस्तार 1970 और 1980 के दशकों में आदिवासी ब्लॉक्स और अत्यधिक गरीबी वाले क्षेत्रों के लिए किया गया था। 
    • वर्ष 1992 तक सार्वजनिक वितरण प्रणाली विशेष लक्ष्यों के बगैर सभी उपभोक्ताओं के लिए एक सामान्य पात्रता योजना थी। 
    • सम्पुष्ट सार्वजनिक वितरण प्रणाली जून 1992 में सम्पूर्ण देश में प्रारंभ की गई। 
    • लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली जून 1997 में प्रारंभ की गई थी।

    खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले विभाग की स्थापना -

    • राज्य में वर्ष 1964 तक खाद्य एवं सहायता विभाग एक संयुक्त विभाग के रूप में कार्यरत रहे। 
    • वर्ष 1964 से सहायता विभाग से अलग होकर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग पृथक से अस्तित्व में आया। 
    • वर्ष 1987 से विभाग द्वारा उपभोक्ता संरक्षण से संबंधित कार्य भी संपादित किए जा रहे हैं। 
    • दिनांक 21 जून 2001 को विभाग का नाम ‘खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले’ विभाग किया गया।
    • इस विभाग की स्थापना सार्वजनिक वितरण प्रणाली का प्रबंध करने और उचित मूल्यों पर खाद्यान्नों का वितरण करने के लिए की गई थी। पिछले कुछ वर्षों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली देश में खाद्य अर्थव्यवस्था के प्रबंधन के लिए सरकार की नीति का महत्वपूर्ण अंग बन गई है। इसके अंतर्गत केन्द्र सरकार ने भारतीय खाद्य निगम के माध्यम से खाद्यान्नों की खरीद, भंडारण, ढुलाई और बल्क आवंटन करने की जिम्मेदारी ले रखी है। राज्य के अंदर आवंटन, गरीबी रेखा से नीचे के परिवार की पहचान करने, राशन कार्ड जारी करने और उचित मूल्य दुकानों के कार्य का पर्यवेक्षण करने सहित प्रचलनात्मक जिम्मेदारी खाद्य विभाग की है। 
    • विभाग द्वारा राज्य में सार्वजनिक वितरण प्रणाली का प्रभावी संचालन करने के साथ ही आवश्यक वस्तुओं की बाजार में उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाती है। 
    • आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 एवं उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 के क्रियान्वयन संबंधित कार्य भी विभाग द्वारा किए जाते हैं।

    खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले विभाग के कार्य -


    प्रमुख रूप से विभाग के कार्य इस प्रकार से हैं -


    • लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली का संचालन एवं क्रियान्वयन।
    • केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित समर्थन मूल्य पर भारतीय खाद्य निगम के लिए राज्य एजेन्सियों के     मार्फत खाद्यान्नों की खरीद।
    • आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत केन्द्र सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा जारी आदेशों का प्रवर्तन।
    • उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 का क्रियान्वयन एवं उपभोक्ता आन्दोलन को गति देने के लिए विभिन्न गतिविधियो का क्रियान्वयन।

        कार्य संपादन


    खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले विभाग द्वारा निम्नलिखित कार्य संपादित किये जाते हैं-
    • भारत सरकार से लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अन्तर्गत वितरण योग्य आवश्यक वस्तुओं का राज्य की मांग के अनुरूप आवंटन प्राप्त करना एवं आवंटित वस्तुओं को उचित मूल्य दुकानों के माध्यम से निर्धारित दरों पर उपभोक्ताओं को वितरण कराना।
    • समर्थन मूल्य नीति के अन्तर्गत खाद्यान्नों यथा- गेंहूँ, जौ, मक्का, बाजरा व धान (पैडी) की कीमत निर्धारित मूल्यों से कम होने पर किसानों के हित में भारत सरकार द्वारा घोषित समर्थन मूल्य पर भारतीय खाद्य निगम के माध्यम से क्रय करने में सहयोग करना।
    • आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 एवं इसके अन्तर्गत प्रसारित विभिन्न आदेशों के प्रवर्तन व कालाबाजारी निवारण एवं आवश्यक वस्तु प्रदाय अधिनियम, 1980 के आदेश के अन्तर्गत जमाखोरी व कालाबाजारी के विरूद्ध कार्यवाही करना।
    • उपभोक्ता हितों के संरक्षण के लिए गठित राज्य आयोग एवं जिला मंचों की प्रशासनिक व्यवस्था संबंधी कार्य करना।
    • उपभोक्ता आंदोलन को गति देने संबंधी कार्य करना।

    राजस्थान में सार्वजनिक वितरण प्रणाली

    सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत खाद्यान्नों के मूल्यों में वृद्धि को नियंत्रित करने और उपभोक्ताओं के लिए खाद्यान्नों की पहुंच सुनिश्चित करने में पर्याप्त रूप से योगदान दिया है। देश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के बाद वर्ष 1997 में लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली प्रारंभ की गई थी।

    सार्वजनिक वितरण प्रणाली के प्रमुख रूप से निम्न उद्धेश्य हैं-
    • आवश्यक उपभोक्ता वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
    • आवश्यक उपभोक्ता वस्तुओं के मूल्यों को स्थिर रखना।
    • कुछ मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से समाज के कमजोर वर्गों को खाद्य सुरक्षा प्रदान करना।
    लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अन्तर्गत राज्य में गेहूँ, चावल, चीनी एवं केरोसीन तेल उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से वितरित किए जाते हैं। उक्त वस्तुएं निर्धारित मात्रा में निश्चित मूल्य लेकर उपभोक्ताओं को राशन कार्ड के आधार पर दी जाती हैं। भारत सरकार से खाद्यान्न आवंटित किए जाने के आदेशों के पश्चात राज्य के जिलों हेतु खाद्यान्न नियत अवधि में उठाव व्यवस्था के साथ उप आवंटन जारी किया जाता है। जिलों में जिला कलक्टर्स द्वारा तहसील/पंचायत समिति अनुसार किये गये आवंटन के आधार पर संबंधित थोक विक्रेता के माध्यम से आवंटित वस्तुएं उचित मूल्य दुकान तक पहुंचाई जाती है। राज्य में वर्तमान (दिसम्बर, 2011) में कुल 176 थोक विक्रेता है।


    आवश्यक वस्तुओं के वितरण के लिए राज्य में कुल 25542 उचित मूल्य की दूकानें स्थापित है, जिनमें से 5736 शहरी क्षेत्र में एवं 19806 दुकाने ग्रामीण क्षेत्र में कार्यरत है। विभाग के आदेश 15.11.2002 द्वारा भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप विशेष भौगोलिक परिस्थितियों में 2000 ईकाइयों पर भी उचित मूल्य की दुकान खोली जा सकती है। जिलेवार उचित मूल्य दुकानों की सूची http://food.raj.nic.in पोर्टल के होम पेज पर अंकित हैं।
    लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के उपभोक्ताओं को खाद्यान्नों की पहुच सुनिश्चित करने हेतु राज्य में राशन टिकिट व्यवस्था लागू की गई है ताकि खाद्य सामग्री की लाभार्थी तक पहुंच सुनिश्चित हो सके।

    राशन कार्ड

     
    राज्य में पृथक-पृथक श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिये पृथक-पृथक रंगों के राशन कार्ड दिये जाने की व्यवस्था प्रकार है:-
     
    योजना (परिवार) राशन कार्ड का रंग                     योजना की पात्रता (योग्यता)
    1- एपीएल
    क- डबल गैस सिलेण्डर धारक                                                       नीला सामान्य उपभोक्ता
    ख- सिंगल गैस सिलेण्डर धारक हरा सामान्य उपभोक्ता
    2- बीपीएल गहरा गुलाबी ग्राम सभा/नगर निगम/नगर पालिका द्वारा चयनित बीपीएल परिवार।
    3- स्टेट बीपीएल गहरा हरा ग्राम सभा/नगर निगम/नगर पालिका द्वारा चयनित स्टेट बीपीएल परिवार।
    4- अन्त्योदय अन्न योजना पीला ग्राम सभा/नगर निगम/नगर पालिका द्वारा चयनित अंत्योदय अन्न परिवार
     
     

    राज्य में राजस्थान लोक सेवाओं के प्रदान की गारन्टी अधिनियम, 2011 दिनांक 14.11.2011 से प्रभावी हो गया है। इस अधिनियम के अन्तर्गत विभाग से संबंधित राशन कार्ड जारी करने का बिन्दु है। इस अधिनियम, 2011 के सन्दर्भ में प्राप्त आवेदन पत्रों पर निर्धारित समयावधि में राशनकार्ड जारी करने की कार्यवाही सुनिश्चित करने हेतु विभागीय आदेश क्रमांक एफ 97(1)खावि/साविप्र/2010-11 दिनांक 11.11.2011 द्वारा सभी जिला कलक्टरों/ जिला रसद अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं तथा राज्य में राशन कार्ड जारी करने के लिए निम्नांकित अधिकारियों को प्राधिकृत किया गया है:-
     
    क्रम सं.          अधिकारी कार्य क्षेत्र
    1. जिला मुख्यालय नगरपालिका क्षेत्र में जिला मुख्यालय नगरपालिका क्षेत्र में
    2. नगरपालिका बोर्ड अधिशाषी अधिकारी/आयुक्त शेष नगरपालिका क्षेत्र में
    3. ग्रामीण क्षेत्र के लिए विकास अधिकारी, संबंधित पंचायत समिति
    4. राज्य सरकार द्वारा विशेष रूप से अधिकृत कोई भी अन्य अधिकारी        --------
    राजस्थान में सार्वजनिक वितरण प्रणाली तथा 'खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग' राजस्थान में सार्वजनिक वितरण प्रणाली तथा 'खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग' Reviewed by asdfasdf on December 23, 2016 Rating: 5

    Annapurna Bhandar Scheme of Rajasthan राजस्थान की अन्नपूर्णा भंडार योजना

    December 23, 2016

    सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के क्षेत्र में नई पहल - अन्नपूर्णा भंडार


    राज्य में आमजन को कम दामों पर परिवार की जरूरत से जुड़े सभी उपभोक्ता वस्तुओं एक ही स्थान पर उपलब्ध करवाने के लिए राज्य में ही नहीं वरन देश में पहली बार एक अनूठी योजना "अन्नपूर्णा भण्डार योजना’’ वर्ष 2015 में लागू की गई। राज्य में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के इतिहास में सार्वजनिक निजी सहभागिता का एक नया दौर शुरू हुआ है। इस योजना के तहत प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में मॉल की तरह ’"अन्नपूर्णा भण्डार योजना" विकसित करने के प्रयास किये जा रहे हैं।

    योजना का मुख्य उद्देश्य -

    सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत सार्वजनिक-निजी सहभागिता के माध्यम से जनसाधारण को उचित मूल्य दुकानों द्वारा उच्च गुणवत्ता की मल्टीब्रांड उपभोक्ता वस्तुएं उचित एवं प्रतिस्पर्धी दरों पर उपलब्ध कराना।

    उद्घाटन - 

    राज्य सरकार ने अन्नपूर्णा भंडार योजना का श्री गणेश 31 अक्टूबर, 2015 को जयपुर जिले की झोटवाडा पंचायत समिति के गांव भंभोरी से किया गया।  इस योजना को प्रारंभ में एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में जयपुर में पांच और उदयपुर में एक अन्नपूर्णा भंडार चला कर शुरू किया गया।

    लक्ष्य -

    अन्नपूर्णा भंडार योजना के प्रथम चरण में प्रदेश की 5000 उचित मूल्य की दुकानों का कायाकल्प करके इन्हें अन्नपूर्णा भंडार के रूप में चलने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसके तहत अभी 5000 से अधिक अन्नपूर्णा भंडार सफलतापूर्वक संचालित किए जा रहे हैं।

    उचित मूल्य की दुकानों को रूरल मॉल्स का रूप देने के प्रयास- 

    अन्नपूर्णा भंडार को एक तरह से "रूरल मॉल्स" का रूप दिया जा रहा है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के इतिहास में इस योजना को लागू करने वाला राजस्थान देश का प्रथम व एकमात्र राज्य है। इन पर आधुनिक पद्धति से उचित मूल्य के दुकानदारों की क्षमता एवं संभावनाओं का विकास किया जाएगा। भविष्य में इन पर मिनी बैंक, खाद-बीज, भंडार की भी सुविधा उपलब्ध रहेगी। प्रारंभ में अन्नपूर्णा भंडार पर उपभोक्ताओं को 45 तरह के 150 से अधिक प्रकार के उत्पाद की बिक्री का प्रावधान किया गया है। इनमें मुख्य रूप से खाद्य तेल, दालें, अचार, गुड़, बिस्किट, मसाले, सौन्दर्य प्रसाधन, साबुन, वॉशिंग पाउडर, शैम्पू, टूथपेस्ट, पेन, नोट बुक, बल्ब, माचिस, चप्पल, फिनायल, टॉयलेट क्लीनर्स आदि उपलब्ध कराए जाने का प्रावधान है। राज्य सरकार का कहना है कि भविष्य में इन पर मिनी बैंक, खाद-बीज, भंडार की भी सुविधा उपलब्ध रहेगी। 
    अन्नपूर्णा भंडार योजना की खास बात यह है कि इसमें बिना राशनकार्ड के कोई भी उपभोक्ता चाहे वह किसी भी तबके का हो, इससे उच्च गुणवत्ता का सामान खरीद सकता है।
    अन्नपूर्णा भण्डार के प्रथम चरण की सफल क्रियान्विति के बाद प्रत्येक ग्राम पंचायत के बड़े गांव में संचालित उचित मूल्य की दुकान पर अन्नपूर्णा भंडार योजना लागू करने के लिए चयन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
    प्रदेश के इस अभिनव प्रयोग से प्रभावित होकर दिल्ली, हरियाणा, छत्तीसगढ़ एवं मध्यप्रदेश सहित 12 राज्यों ने भी प्रदेश में अन्नपूर्णा भण्डारों का भ्रमण कर इसमें गहरी रूचि दर्शाई है।

    फ्यूचर ग्रुप के साथ एम ओ यू - 

    राजस्थान सरकार के उपक्रम राजस्थान राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम और मैसर्स फ्यूचर कन्ज्यूमर इंटरप्राइजेज लिमिटेड, मुंबई के बीच इस योजना के लिए समझौता किया है। यह फ्यूचर ग्रुप देश में बिग बाजार नामक रिटेल मॉल चलाने के लिए प्रसिद्ध है। इस योजना के अतंर्गत फ्यूचर ग्रुप राशन दुकानों के माध्यम से फ्यूचर ग्रुप के 250 प्रोडक्ट को की बिक्री को रखा जाना है। इनमें दाल, मसाले, तेल और बिस्कुट बेसन, मैदा, रवा, अचार, सॉस और टेलकम पाउडर, शैम्पू, क्रीम, टूथब्रश, जैसी चीजें खाद्य सामग्रियां और रोजमर्रा उपयोग की वस्तुएं शामिल है। वर्तमान में इस योजना के अन्तर्गत 45 कैटेगरी के 150 से अधिक प्रकार के मल्टी ब्राण्डेड उत्पादों की आपूर्ति सीधे उचित मूल्य दुकानों पर समयबद्ध तरीके से की जा रही है। इन उत्पादों की एमआरपी पर 2 से अधिकतम 30 प्रतिशत तक की छूट उचित मूल्य दुकानदारों को प्राप्त हो रही है।

    दुकानदार को अनुमानित लाभ - 

    इन अन्नपूर्णा भण्डारों पर बेचे जाने वाले सामान पर उचित मूल्य दुकानदार को 40 प्रतिशत लाभ हो रहा है तथा शेष 60 प्रतिशत लाभ उपभोक्ताओं को दरों में छूट के रूप में मिल रहा हैं।

    दुकानदार को सहायता -


    अन्नपूर्णा भंडार योजनान्तर्गत राज्य सरकार की ओर से कोई फंड उपलब्ध नहीं करवाया जाता है, बल्कि अन्नपूर्णा भंडार खोलने के लिए प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत कम ब्याज दर पर 10 लाख तक का ऋण मुहैया करवाया जा रहा है। अन्नपूर्णा भंडार संचालक आवश्यकतानुसार 10 लाख तक का ऋण ले सकेगा। इसके लिए राज्य सरकार ने यूनाईटेड बैंक ऑफ इण्डिया एवं यूनियन बैंक ऑफ इण्डिया को ऋण के लिए अधिकृत किया है।

    फर्नीचर हेतु किया गया व्यय - 

    अन्नपूर्णा भण्डार दुकान की साज-सज्जा व फर्नीचर हेतु किया गया व्यय उचित मूल्य दुकानदार द्वारा वहन किया जाता है जबकि दुकान पर लगाने हेतु लगाये जाने वाला अन्नपूर्णा भण्डार का ‘लोगो‘ फ्लेक्स बोर्ड के रुप में आपूर्तिकर्ता फर्म द्वारा प्रथम आपूर्ति के समय उचित मूल्य दुकानदार को निःशुल्क उपलब्ध कराया जाता है।

    माल की आपूर्ति का किराया - 

    अन्नपूर्णा भण्डार पर आपूर्ति किए जाने वाले माल की आपूर्ति का किराया पूर्ण रुप से आपूर्तिकर्ता फर्म द्वारा वहन किया जाएगा अर्थात माल की दुकानों तक निःशुल्क डोर-स्टेप डिलीवरी की जाती है।

    दुकानदार द्वारा माल का भुगतान - 

    अन्नपूर्णा भण्डार पर आपूर्तिकर्ता फर्म द्वारा आपूर्ति किए गए माल का भुगतान दूकानदार द्वारा आपूर्तिकर्ता फर्म के प्रतिनिधि को नगद एवं चैक के रुप में भुगतान करके अथवा अधिकतम दस दिवस के पोस्ट डेटेड चैक के रुप में किया जा सकता है। नगद भुगतान करने पर दुकानदार को 2 प्रतिशत की छूट का प्रावधान है।

    अन्नपूर्णा भण्डार पर आपूर्तिकर्ता फर्म द्वारा पहली बार आपूर्ति किए गए सामान में से अगर किसी सामान की बिक्री नही होती है तो उसे आपूर्तिकर्ता फर्म द्वारा पुनः लिया जाता है। उचित मूल्य दुकानदार द्वारा पुनः आर्डर (रिआर्डर) पर मंगवाए गए सामान को बेचने की जिम्मेदारी स्वयं दुकानदार की होती है।

    अन्नपूर्णा भण्डार की रनिंग-कोस्ट- 

    अन्नपूर्णा भण्डार का चलाने में आ रही लागत अर्थात ‘रनिंग-कोस्ट‘ उचित मूल्य दुकानदार द्वारा वहन की जाती है।

    मुनाफे का सरकारी अनुमान- 

    अन्नपूर्णा भण्डार पर आपूर्ति किए गए विभिन्न प्रकार के समग्र सामान का यदि एक उचित अनुपात में विक्रय होता है तो विक्रय मूल्य का लगभग आठ से दस प्रतिशत उचित मूल्य दुकानदार को लाभ के रुप में प्राप्त हो सकता है।

    'रि-आर्डर' की प्रकिया - 

    अन्नपूर्णा भण्डारों पर सामान आपूर्ति हेतु आपूर्तिकर्ता फर्म द्वारा स्थापित किए गए डिपो पर फर्म के प्रतिनिधि से टेलीफोन, मोबाइल अथवा ई-मेल द्वारा रि-आर्डर दिया जा सकता है। ‘रि-आर्डर‘ हेतु न्यूनतम पांच हजार रु. की राशि निर्धारित की गयी है। अन्नपूर्णा भण्डार पर ‘रि-आर्डर‘ देने के अधिकतम सात दिवस में सामान की आपूर्ति निर्धारित की गयी है।

    अन्नपूर्णा भण्डार खोलने हेतु मानदंड- 


    1. उचित मूल्य की दुकान डीलर की स्वयं की होनी चाहिए। (कुछ शर्तों पर किराये की दुकान भी हो सकती है)
    2. दुकान का न्यूनतम क्षेत्रफल 10 x 20 (200 वर्गफीट) होना चाहिए।
    3. दुकान कम से कम 30 फीट रोड पर खुलती हुई होनी चाहिए।
    4. इस मॉडल को स्वीकार करने के लिए उचित मूल्य दुकानदार की सहमति होनी चाहिए।


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